किसानी,जवानी और पानी को सहेजकर हरदिया चौर के ग्रामीण अपने को समृद्ध बनाएं
किसानी,जवानी और पानी को सहेजकर हरदिया चौर के ग्रामीण अपने को समृद्ध बनाएं

जे टी न्यूज, सोनपुर: इस इलाके की भलाई और मांग यही है कि हरदिया चौर को बचाकर अपनी सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए किसान और युवा आगे बढ़े।
अपनी सभ्यता, तहजीब और सुख-समृद्धि को बचाने हेतु हरदिया चौर को बचाने किसान और जवान सड़क पर उतरे। 2001 में फिलिपींस में मेंग्सासे पुरस्कार तथा 2015 में स्टॉकहोम वॉटर प्राइज,जिसे हम नोबेल पुरस्कार ऑफ वाटर के नाम से जानते हैं, विश्व के विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित, जिन्हें दुनिया जल पुरुष राजेंद्र सिंह के नाम से जानती है। उन्होंने आज किसान आंदोलन की ऐतिहासिक भूमि सोनपुर के सरनारायण गाँव के जगदंबा स्थान पर हरदिया चौर बचाओ संघर्ष समिति द्वारा आयोजित विशाल किसान महापंचायत का उद्घाटन करते हुए कहा की एयरपोर्ट एवं कृत्रिम आर्थिकी के लिए बिहार के सोनपुर दरियापुर का यह क्षेत्र अनुकूल नहीं है। प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इस क्षेत्र को भूतकाल में सोने की चिड़िया बनाने के लिए आपके पुरखों ने जो अपना खून जलाया और अपनी श्रम एवं निष्ठा से इस क्षेत्र को समृद्ध बनाया है, उस बहुमूल्य विरासत और दौलत को लूटने के लिए विकास का झूठा लॉलीपॉप दिखाकर आपके बीच जो विनाशकारी एजेंडा एयरपोर्ट या आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने का जो हसीन सपना दिखाया जा रहा है। उसके पीछे उनके खेल को आप समझें और सचेत हो,संगठित हो। सरकार और सरकार को नचाने वाले लुटेरे अडानी जैसे औद्योगिक घरानों को यहां के लोगों को समृद्धि और सम्मान हेतु स्मार्ट गांव के रूप में विकसित करने की बात सोचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों, उपजाऊ मिट्टी और कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उजाड़कर किया जाने वाला विकास कभी टिकाऊ नहीं हो सकता। सरकार को किसानों की भूमि और पर्यावरण की रक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। किसान किसी भी कीमत पर अपना पुश्तैनी जमीन नहीं दें। इस क्षेत्र के युवा एवं किसान इस उजाड़ने वाली, तबाही-व- बर्बादी एवं विनाशकारी कथित विकास की नीतियों के खिलाफ आज अहिंसक एवं शांतिमय संघर्षरत हैं। यहाँ की युवा और किसान संगठित होकर अपने क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए आज लामबंद हो रहे हैं,जो अपनी जान की बाजी लगाने को भी तैयार हैं।सरकार को इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए और इस विनाशकारी योजना को अविलंब वापस लेना चाहिए। पूंजीवादी विकास की इस विनाशकारी नीतियों के चलते आज हमारी प्राकृतिक नदियाँ बेमौत मर रही है। इस चौर मे एयरपोर्ट बनने से यह पूरा इलाका एक नया डूब क्षेत्र में तब्दील हो जाएगी। प्राकृतिक एवं पर्यावरण की हिफाजत के लिए समाज को मिलजुल कर संघर्ष को तेज करना होगा।आपकी इस लड़ाई में हमेशा हम सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि हम लड़ेंगे,वहाँ उपस्थित जनसमूह ने चार बार दुहराया हम जीतेंगे, हम जीतेंगे।
किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के बिहार प्रभारी एवं किसान नेता दिनेश कुमार ने कहा कि एयरपोर्ट और ग्रीनलैंड सैटलाइट टाउनशिप की सरकारी योजनाएं गांव,खेती,बागवानी और हमारी आजीविका विरोधी है। खेती हमारी सिर्फ जीविका ही नहीं है,बल्कि वह हमारी सभ्यता एवं हमारी तहजीब है। हमारे रहन-सहन,खान-पान,
रस्मो-रिवाज,पूजा-पाठ,
पर्व-त्यौहार सब कुछ कृषि आधारित है। लोग अपना जन प्रतिनिधि इसलिए चुनते हैं कि वह हमारी आवाज बनेंगे,ना कि कारपोरेटों का एजेंट बनकर उन्हीं से हाथ मिलालेंगे।मगर आपका विधायक एवं सांसद की चुप्पी अंबानी-अडानी के पक्ष में है। इसे आपको समझना और लोगों को समझाना चाहिए।महान क्रांतिकारी जूलियस फ्यूचिक ने कहा था कि जिंदगी और मौत की लड़ाई में कोई मुक दर्शक नहीं होता है बल्कि किसी न किसी के पक्ष में होता हैं।आपके प्रतिनिधियों की चुप्पी आपके विरुद्ध कॉर्पोरेट के पक्ष में है।यह बात यहां के लोगों को समझना चाहिए।

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री जनाब अखलाक अहमद जी ने अपना उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि इस एयरपोर्ट का निर्माण सरकार आपके विकास के लिए नहीं बल्कि अपने सुप्रीमो के प्रिय अंबानी-अड्डानी के विकास के लिए आपके पुरखों की गाढी कमाई से अर्जित उनके अमानत को आप से छीन कर अपने मित्र को देना चहती है, ताकि वे यहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहण कर एवं यहां की प्रचुर मात्रा में उपलब्ध अमृत रूपी पानी एवं कृषि पैदावार को सस्ते दर पर लूटकर विश्व बाजार में बेचकर बेशुमार मुनाफा बटोर सके।अम्बानी अड्डानी जानता है कि कोई बड़ा खेलाड़ी हमारे प्राकृतिक संपदा का लुटेरा बिहार में अभी नहीं पहुँचा है। इसलिए बिहार और नेपाल के प्राकृतिक एवं कृषि संपदा को लूटकर बड़े पैमाने पर दुनियाभर में व्यापार कर बेशुमार दौलत कमाने के लिए अडानी यहां आ रहा है, ना कि वह इस इलाके का विकास करने वाला है। इस अवसर पर बिहार दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध किसान नेता अशोक प्रसाद सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जन्मभूमि सोनपुर है।जहां ब्रिटिश हुकूमत में किसान विरोधी बिल बिहार असेंबली में पेश हुआ था,तो उसके विरोध में एशिया महादेश का सबसे बड़ा किसान मेला सोनपुर मेला के अवसर पर अंग्रेजों के आँखों में धूल झोंकने हेतु मेला परिसर में ही 17 नवंबर 1929 को स्वामी सहजानंद सरस्वती ने बिहार राज्य किसान सभा की स्थापना कर अंग्रेजों को बिल वापस करने हेतु मजबूर किया था। आज जल पुरुष राजेंद्र सिंह एक बार फिर हमारे बीच आकर स्वामी जी की तरह शंखनाद करने आये हैं कि आपलोग जगे,संगठित हो और अपने हक की लड़ाई के लिए अपना जुझारू संघर्ष को तेज करें। जल ही जीवन है, इस अमृत रूपी जल को बंगाल की खाड़ी से लाकर बिना पेट्रोल डीजल खर्च किए बादल हमारे बीच उस अमृत को पहुंचती है। जिसे सहेज कर यदि हम रखें तो हमारे लिए वरदान बन सकता है। हम उससे बिजली पैदा कर,सिंचाई एवं मत्स्य पालन आदि से बिहार को सबसे समृद्ध राज्य बना सकते हैं।मगर दुर्भाग्य है कि सरकार की कोई ठोस योजना के अभाव में वही अमृत हमारे लिए विष बनकर हर साल बाढ़ की भीषण विभिषका के रूप में भयानक तबाही मचाते हुए हमारे जान-माल एवं फसलों को रौंदते एवं मसलते हुए पुनः लौटकर उसी समुद्र में पहुंचती है।उन्होंने कहा कि यदि इस हरदिया चौर में एयरपोर्ट बनेगा तो न सिर्फ जमीन मालिकों का ही नुकसान होगा,बल्कि इससे खेती पर निर्भर सभी मजदूर और पौनी भी बर्बाद होंगे।

इलाके के सभी चापाकल,
नलकूप और कुआं सब सुख जाएंगे। एयरपोर्ट से निकलने वाला विषैले अपशिष्ट से ऐसी बीमारी इलाके में फैलेगी कि लोगों का यहाँ जीना माहौल हो जाएगा। किसान महापंचायत की अध्यक्षता रामायण कुमार ने की।इस अवसर पर आगत अतिथियों का स्वागत जिला पार्षद गोलक बिहारी शरण सिंह ने की।
किसान महापंचायत में मुखिया जितेंद्र राय,पूर्व जिला पार्षद राजनाथ राय,पैक्स अध्यक्ष महेश सिंह,रोशन सिंह,धीरज सिंह, अभिमन्यु सिंह,संतराज सिंह, मोनू सिंह,मन्नू राय,जोगेंद्र प्रसाद,दिनेश सिंह आदि ने अपना विचार व्यक्त किया और संघर्ष को तेज करने हेतु गाँव-गाँव में संगठन को मजबूत करने का सर्व सम्मत निर्णय हुआ।उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए कहा कि जमीन केवल मिट्टी का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि हमारी पहचान और आने वाली पीढियों का भविष्य है। किसानों ने संकल्प लिया कि जान दे देंगे, परंतु अपनी जमीन नहीं देंगे। इसके लिए आर-पार की लड़ाई का उन्होंने ऐलान किया।
