*चम्पारण के महान स्वतंत्रता सेनानी बिंदेश्वरी प्रसाद राव के 16 सितंबर स्मृति दिवस पर विशेष* आलेख–प्रभुराज नारायण राव

*चम्पारण के महान स्वतंत्रता सेनानी बिंदेश्वरी प्रसाद राव के 16 सितंबर स्मृति दिवस पर विशेष*
आलेख–प्रभुराज नारायण राव


बेतिया।पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड के लौकरिया निवासी स्वतंत्रता सेनानी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय बिंदेश्वरी प्रसाद राव ब्रिटिश हुकूमत से देश को आजाद करने की लड़ाई में शामिल होकर अंग्रेजों को देश से भगाने में अहम भूमिका निभाई थी। यूं तो स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई उनको विरासत में मिली थी।
1917 में 22 अप्रैल को मोहनदास करमचंद गांधी जब बेतिया आए तो हजारीमल धर्मशाला में ठहरे। 23 अप्रैल को कुड़िया कोठी और सिंगा छापर का दौरा किया । 24 अप्रैल की सुबह ब्रजकिशोर बाबू के साथ बाबू खेंहर राव के घर लौकरिया के लिए प्रस्थान किये । लौकरिया पहुंचते ही किसानों की भारी भीड़ जमा हो गई और बैरिया कोठी के मैनेजर मिस्टर गेल के दमन और ज्यादती के खिलाफ लोगों ने फरियाद करना शुरू कर दिया। गांधी जी ने उन किसानों के फरियाद को लिखने के लिए रामाश्रय राव, मुख लाल चौबे, गंगा राय ,ब्रज किशोर बाबू को जवाबदेही दिया ।दूसरे दिन 25 अप्रैल की सुबह डॉ राजेंद्र प्रसाद ,आचार्य कृपलानी भी लौकरिया पहुंच गए और पीड़ित किसानों के लंबी कतार को देख बेतिया एस डी ओ लिविस की उपस्थिति में उनके फरियाद लिखने में वह भी शामिल हो गए।इस बीच गांधी जी शिवराजपुर,भेड़ीहारी, करमैनी ,तधवा नंदपुर, बैरिया आदि जगह पर जहां किसानों के साथ ज्यादती की गई थी।वहां जाकर लोगों से जानकारी हासिल की और शाम में बैरिया कोठी के मैनेजर मिस्टर गेल से मिलकर इन घटनाओं के बारे में पूछताछ की।

*चम्पारण के महान स्वतंत्रता सेनानी बिंदेश्वरी प्रसाद राव के 16 सितंबर स्मृति दिवस पर विशेष*
आलेख–प्रभुराज नारायण राव

गांधी जी के सेवा टहल,चाय पानी देने वाले छोटे बच्चों में से एक बाबू रामाश्रय राव का 8 साल का लड़का बिंदेश्वरी प्रसाद राव भी थे।जिनके अंदर अंग्रेजों के प्रति नफरत बढ़ता जा रहा था और अंग्रेजों को देश से भगाने को ठान ली।धीरे धीरे बढ़ते उम्र के साथ गोरी चमड़ी वालों के खिलाफ गांवों में लड़कों को गोलबंद कर गोरी चमड़ी वालों भारत छोड़ो,अंग्रेजों वापस जाओ,ब्रिटिश हुकूमत मुरादाबाद आदि के नारे लगने लगे।बिंदेश्वरी प्रसाद राव को ब्रिटिश हुकूमत विरोधी संलिप्तता में दोषी करार दे कर प्रथम बार 10.02.1933 को गिरफ्तार कर लिया गया।जिन्हें मोतिहारी और पटना जेल में कठिन यातनाएं दी जा रही थी।उनके पिता रामाश्रय राव और कांग्रेस नेताओं के प्रयास से 13.09.33 को पटना जेल से रिहा हुए।उन्हें 1938 में फिर गिरफ्तार कर लिया गया।
चम्पारण किसान विद्रोह के नेतृत्व की भूमिका में आने के बाद चम्पारण के किसानों ने गांधी जी को महात्मा की उपाधि दे डाली थी।1942 में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया।जिसे अगस्त क्रांति के नाम से जाना जाता है।24 अगस्त 1942 को बेतिया में अंग्रेजों भारत छोड़ो नारे के साथ जुलूस निकाला गया।इस जुलूस में शामिल होने के लिए बिंदेश्वरी प्रसाद राव,लक्ष्मी प्रसाद,शिव प्रसाद,इंद्रासन राव, रघुनी राम, रोझा राउत,सुदामा मिश्र,राजा सिंह,रामनारायण सिंह आदि लोगों के साथ भारी संख्या में बेतिया के लिए चल दिए।
कोतवाली चौक स्थित कांग्रेस आश्रम से हजारों की संख्या में जुलूस निकला जो छोटा रमना से आगे ज्यों ही बढ़ा।तिरहुत कमिशनरी के कमिश्नर पैक ने मशीनगन से गोली चलाने का आदेश दिया और लाशें गिरनी शुरू हो गई।जिसमें 8 नौजवानों ने शहादत दे दी।उसमें से एक लौकरिया निवासी 12 साल का जगन्नाथ पुरी जो बिंदेश्वरी प्रसाद राव के साथ आया था।शहीद हो गया।वह गोसाईं जी का एक मात्र पुत्र था।उस बच्चे की शव को गोसाई जी तक ले जाने की साहस बिंदेश्वरी प्रसाद राव में नहीं हो पा रही थी।
29 अक्टूबर 1942 को बिंदेश्वरी प्रसाद राव फिर गिरफ्तार कर लिए गये।जो 25 .08.1943 को पटना जेल से रिहा हुए।उनका पूरा जीवन संघर्षमय था।वे कांग्रेस के नेता के रूप में रहे।लेकिन जनता की मौलिक समस्याओं के लिए निरंतर संघर्ष करते हुए 16 सितंबर 1987 को केदार धाम जाने के क्रम में गौरी कुंड में हृदयगति रुक जाने के चलते हमेशा के लिए हम सब को छोड़ कर चले गए।उनके 40 वीं स्मृति दिवस पर नम आंखों से हार्दिक श्रद्धांजलि।

 

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