आंगनबाड़ी सेविकाओ से विभागीय पदाधिकारी बन किया ठगी, थाना में दिया आवेदन।

आंगनबाड़ी सेविकाओ से विभागीय पदाधिकारी बन किया ठगी, थाना में दिया आवेदन।

जे टी न्यूज, मुरलीगंज, मधेपुरा :
प्रखंड क्षेत्र के रजनी पंचायत प्रतापनगर में विभागीय पदाधिकारी बताकर जांच के नाम पर ठगी करने का मामला प्रकाश में आया है। घटना को लेकर पीड़ित ने थाना में आवेदन दिया है। प्रतापनगर गांव के आंगनबाड़ी केंद्रों की तीन सेविकाओं ने मुरलीगंज थाना में आवेदन देकर एक व्यक्ति पर पदाधिकारी बनकर औचक निरीक्षण करने और नौकरी बचाने के नाम पर कुल 10 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। वहीं, इसी व्यक्ति द्वारा मध्य विद्यालय प्रतापनगर में जांच के नाम पर प्रधानाध्यापक से एक हजार रुपये लेने तथा दो ग्रामीणों को मातृ लाभ की राशि भेजने का झांसा देकर उनके बैंक खातों से कुल 67,173 रुपये निकालने का भी आरोप लगाया गया है। आंगनबाड़ी सेविकाओं शोभा देवी, सुनीता कुमारी और कृष्णा देवी के आवेदन के अनुसार 21 सितंबर को एक व्यक्ति प्रतापनगर केंद्र संख्या 152 पर पदाधिकारी बनकर पहुंचा और औचक निरीक्षण किया। इसके बाद केंद्र संख्या 154 और 155 का भी निरीक्षण किया। आरोप है कि निरीक्षण के बाद उसने नौकरी बचाने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की और रुपये नहीं देने पर नौकरी खत्म कराने की धमकी दी।

इसके बाद तीनों सेविकाओं ने क्रमशः 5 हजार, 3500 और 1500 रुपये, कुल 10 हजार रुपये उसे दिए। आवेदन के अनुसार उक्त व्यक्ति ने निरीक्षण पंजी पर अपना नाम सुमित (पीएम – प्रोजेक्ट मैनेजर) लिखा था। बाद में सेविकाओं ने आंगनबाड़ी कार्यालय, मुरलीगंज से संपर्क किया तो कथित निरीक्षण को लेकर संदेह हुआ। जानकारी मिली कि की फर्जी व्यक्ति गया है। वहीं रुपये लेने के बाद वह प्रतापनगर वार्ड एक निवासी प्रेमचंद महतो के घर चला गया। जिसके बाद उसके बारे में पता चला कि वह प्रेमचंद्र महतो का रिश्तेदार है। वहीं बाद में मामले को लेकर ग्रामीणों की बैठक हुई, बैठक में फोन कॉल पर पूछताछ के दौरान उस व्यक्ति ने पुर्णिया जिला के धमदाहा अमारी कुकरन पूरब वार्ड 6 निवासी अभिषेक सहनी, पिता अशोक सहनी बताया। उन्होंने ग्रामीणों से भी गलत व्यवहार किया। बाद में फर्जी अखबार कटिंग बना कर ग्रामीणों और सेविकाओं को डराने का भी प्रयास किया। वही 23 सितंबर को प्रतापनगर वार्ड एक निवासी 56 वर्षीय विजय साह के मोबाइल पर उसी व्यक्ति का फोन आया। उसने मातृ लाभ की राशि बकाया होने और खाते में पैसा भेजने की बात कही। इसके लिए मोबाइल पर आने वाले मैसेज को खोलकर पिन डालने को कहा गया। विजय साह ने उसकी बात पर विश्वास कर प्रक्रिया पूरी की। आरोप है कि अलग-अलग चरणों में कुल 11 ट्रांजेक्शन के माध्यम से उनके बैंक खाते से 47 हजार रुपये निकाल लिए गए। विजय साह के अनुसार वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और कर्ज चुकाने के लिए रुपये जमा कर रखे थे। खाते से राशि निकल जाने के बाद वे काफी चिंतित हैं। उन्होंने राशि वापस कराने की मांग करते हुए पुलिस विभाग के वरीय अधिकारी को भी आवेदन दिया है। पीड़ितों ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कर आरोपित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा ठगी गई राशि वापस कराने की मांग की है। सेविकाओं के आवेदन में बताए गए मोबाइल नंबरों और घटनाक्रम की जांच की मांग भी की गई है। मध्य विद्यालय एचएम वीरेंद्र भारती ने बताया कि वह खुद को प्रोजेक्ट मैनेजर बताते हुए कहा कि वह जांच के लिए आया है। इसके बाद उसने विद्यालय के विभिन्न रजिस्टर देखने शुरू कर दिए और भवन निर्माण को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि भवन अधूरा क्यों है। एचएम द्वारा विभाग से जानकारी लेने की बात कहने पर आरोप है कि उसने धौंस जमाना शुरू कर दिया। एचएम ने रुपये देने से इनकार किया, लेकिन ग्रामीणों के दबाव में बाद में उसे एक हजार रुपये दिए गए। साथ ही उन्होंने बताया कि करीब दो घंटे तक उक्त व्यक्ति ने जांच के नाम पर पठन पाठन बाधित कर दिया।

थानाध्यक्ष अकमल हुसैन ने बताया कि
आवेदन प्राप्त हुआ है, मामले की जांच की जा रही है। जांचोपरांत कार्रवाई की जाएगी।

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