नेतन्याहू होश में आओ फिलिस्तीन पर हमले बन्द करो
नेतन्याहू होश में आओ फिलिस्तीन पर हमले बन्द करो
आलेख – प्रभुराज नारायण राव

जे टी न्यूज
फिलिस्तीन पर इजरायली हमले के लगभग सवा माह हो गए।लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू अमेरिकी साम्राज्यवाद के इशारे पर लगातार फिलिस्तीन पर हमले करता जा रहा है। उसकी निगाह फिलिस्तीन के गैस भंडार और तेल पर टिका हुआ है। वह इस कीमती भंडार को अपने कब्जे में लेना चाहता है और इसके लिए अब तक 20 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनियों की जान ले लिया है। अब तो इजरायल द्वारा रिहायशी इलाकों तथा अस्पतालों पर हमले किए जा रहे हैं।
यह वही यहूदी है जिन पर जर्मनी में हिटलर की नाजी पार्टी द्वारा हमले किए गए थे । बड़े पैमाने पर बम बरसाए गए थे। लाखों यहूदियों की हत्याएं की गई थी। वहां से जान बचाकर भागने वाले यहूदियों को फिलिस्तीन ने शरण दिया था।अपने यहां उनको जगह देकर बसाया और आज वही यहूदी जिसके प्रधानमंत्री नेतन्याहू है । जो फिलीस्तीन को ही अपना निशाना बनाए हुए हैं । यह बिल्कुल हिटलर की फासीवादी राह पर चल रहे हैं। जैसा हिटलर ने इनके साथ किया था ।ठीक उसी रास्ते पर ये चल रहे हैं।यह तो वही बात हुई की जिस थाली में खाते हैं ।उसी में छेद करते हैं और यह सब अमेरिका जैसे युद्ध खोर के सहयोग से हो रहा है।

आज भारत में कई ऐसे टी वी चैनल है जो फिलिस्तीन के बदले हमास जैसे आतंकी संगठन का नाम लेते हैं।वे इस युद्ध को इजरायल और हमास के बीच का युद्ध बतलाते हैं और वैसे टी वी चैनल इजरायल जैसे फासीवादी देश के पक्ष में खड़े नजर आते हैं।जो भारत फिलिस्तीन के पक्ष में सदियों से खड़ा है।आज उसका पूंजीवादी हिस्सा इजरायल के पक्ष खड़ा दिखता है। यहीं कारण है कि उनके चैनल फिलिस्तीन विरोधी नजर आ रहे हैं। अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी नीति स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं।

भारत में भी इजरायल जैसे घृणित व अवसरवादी घटना पिछले दिनों देखने को मिला है। एक गरीब और लाचार सहेली को एक संपन्न महिला सहेली ने अपने घर में शरण दिया। वह हराम खोर सहेली उसके पति को ही फंसा लिया । उसकी सारी संपत्ति पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं उस शरीफ सहेली को घर से भी निकाल दिया और सहेली के पैसे से अभिनेत्री बन गई। अब शोहरत उसके पैर चूमने लगे। अब वह यहीं तक कहां रुकने वाली थी। वह इतनी लंबी छलांग मारी की देश के प्रधानमंत्री की ही करीबी बन गई। कई विभागों की मंत्री बनती चली गई और दूसरे ने अपनी पत्नी को ही लात मार दी और दोनों शोहरत लूट रहे हैं। इस निम्न स्तरीय स्वार्थी तत्वों को जनता द्वारा समर्थन मिलना ,हमारे विकृत सामाजिक स्तर को ही प्रदर्शित करता है। पूंजीवादी व्यवस्था और पाश्चात्य सभ्यता हमारी सभ्यता और संस्कृति को और विकृत बनाता जा रहा है। हमें पता है कि नीतियां ऊपर से बनती है और लागू भी ऊपर से ही होती है। लेकिन जब हमारा सर्वोच्च नेतृत्व ही इसके शिकार हो जाता है तो उसका खिलाफत करना जनमन का कर्तव्य बन जाता है।
लेकिन किसको कहें की हाथ में मशाल को थामिए,रखते हैं यहां मोम के पैकर तमाम लोग*
