जानलेवा साबित हो रहा है समूह लोन, सरकार महिलाओं का लोन माफ करें: बंदना सिंह

जेटी न्यूज।
समस्तीपुर । समूह लोन जानलेवा साबित हो रहा है। महिलाएं घर-परिवार चलाने में कर्ज ले लेती हैं लेकिन आमदनी के आभाव के कारण समय पर न कर्ज चुका पाती है और न ही ब्याज भर पाती हैं। फलतरू कर्ज बढ़ता ही चला जाता है। माइक्रोफाइनेंस कर्मी महिलाओं को घर पर आकर अपमानित करते हैं, घर में ताले लगा देती हैं, उठाकर ले जाने की धमकी, जेल भेज देने की धमकी तक दिया जाता है। उल्टे पति का प्रताड़ना झेलना पड़ता है और अंततः किंकर्तव्यविमूढ़ होकर कर्जदार महिलाएं आत्महत्या करने को विवश हो रही है। समस्तीपुर नगर निगम के भगीरथपुर में महिला द्वारा आत्महत्या का मामला हो या फिर जीतवारपुर के कर्जदार महिला द्वारा ट्रेन से कटकर जान देने जैसे रोज व रोज घटने वाले अनेकानेक घटना मामला समूह के कर्जदार से जुड़ी रहती है। उक्त बातें महिला संगठन ऐपवा सह भाकपा माले राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह ने संवाददाताओं से एक अनौपचारिक भेंट के दौरान कही। उन्होंने लगातार दलित – गरीबों के गांव- टोले में बैठक से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि माइक्रोफाइनेंस कंपनी के कर्मी महिलाओं को लोन के प्रति प्रेरित कर लोन उठवा देता है। लोन से प्राप्त रुपये आवश्यक एवं अनावश्यक कार्य जैसे मोबाइल, दो चक्का वाहन, कपड़े, बच्चों के पढ़ाई लिखाई, बढ़ती महंगाई आदि में खर्च हो जाता है। इधर समूह लोन का ब्याज दर ब्याज बढ़ता ही चला जाता है, काम या फिर आमदनी के आभाव में न तो कर्जदार महिलाएँ को समय पर न ही सूद चुकाना संभव होता और न ही मुलधन। जिससे फाइनेंस कर्मी लगातार कर्जदार महिला को हरेक तरह से प्रताड़ित किया करते हैं। कई जगह तो कर्जदार महिला को गहने, जमीन तक बेचना पड़ता है। शायद ही समस्तीपुर जिला के कोई पंचायत हो जहां दो-चार परिवार कर्ज के डर से गांव छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन कर कमाने के लिए भागा हुआ न हो। उन्होंने बताया कई महिलाएं फाइनेंस कर्मी या फिर उनके बाउंसर का प्रताड़ना मसलन घर पर चढ़कर मारने-पीटने की धमकी देना, पुलिस बुलाना, जेल भेज देना, घर में ताला लगा देना आदि झेल नहीं पाती है और किंकर्तव्यविमूढ़ होकर आत्महत्या जैसे घातक कदम उठा लेती है जो उचित नहीं है। महिला नेत्री बंदना सिंह ने सरकार से समूह लोन माफ करने, महिलाओं के लिए काम की व्यवस्था करने, मुख्यमंत्री लघु उद्यमी योजना का 2-2 लाख रूपये सहयोग देने, ग्रामीण महिलाओं को मनरेगा में काम एवं 6 सौ रुपए मजदूरी देने, अन्य राज्यों की भांति बिहार में भी 2 सौ यूनिट बिजली फ्री देने, 5 सौ रूपए में रसोई गैस सिलेंडर देने, महिलाओं के खाते में प्रति महीना 3-3 हजार रूपए देने, राशन के चावल-गेहूं के साथ चीनी, तेल, चना, दाल आदि देने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन 3 हजार रूपए महीना देने जैसे कल्याणकारी योजना के जरिए कर्जदार महिलाओं की सहायता में सरकार को आगे बढ़कर कर्जदार महिलाएं को मदद कर कर्ज की जाल से मुक्ति दिलाने की मांग की।

