नहीं रहे झारखंड राज्य सचिव मंडल के पूर्व सदस्य कॉमरेड एसपी तिवारी
नहीं रहे झारखंड राज्य सचिव मंडल के पूर्व सदस्य कॉमरेड एसपी तिवारी
जे टी न्यूज़, पटना : सीपीआई (एम), बिहार राज्य सचिव मंडल एवं झारखंड राज्य सचिव मंडल के पूर्व सदस्य कॉमरेड एसपी तिवारी का आज सुबह पटना के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। उनकी उम्र लगभग अस्सी साल थी। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के दौरान तत्कालीन एसएफआई के नेताओं प्रकाश करात एवं सुनीत चौपड़ा के सम्पर्क में आने के बाद वे एस एफ आई से जुड़ गए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के संविधान का प्रारूप तैयार करने में भी कॉमरेड शिव प्रसाद तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 1977 में आपातकाल की समाप्ति के बाद पार्टी के निर्देशानुसार उन्होंने बिहार से काम करने का फैसला लिया। बिहार में आने के बाद उन्होंने पार्टी के पूरावक्ती कार्यकर्ता बनकर नौजवान मोर्चे पर काम करना शुरू किया और उन्हें जनवादी नौजवान सभा के राज्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई । लगभग एक दशक तक उन्होंने जनवादी नौजवान सभा के राज्य सचिव की जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह किया। उन्हें सीपीआई (एम ) बिहार राज्य सचिव मंडल के सदस्य के रूप में भी निर्वाचित किया गया। बिहार के बंटवारे के बाद उन्होंने झारखंड में पार्टी की ज़िम्मेदारी संभालनी शुरू की और अपनी प्रतिबद्धता और समर्पित भाव से जिम्मेदारियों का निर्वाह करने की वज़ह से उन्हें पार्टी की झारखंड राज्य सचिव मंडल के लिए निर्वाचित किया गया। बौद्धिक रूप से बहुत ही परिपक्व साथी एसपी तिवारी को मार्क्सवाद- लेनिनवाद की क्रांतिकारी विचारधारा की गहरी समझ थी। व्यक्तिगत जीवन में वे जितने विनम्र,मृदुभाषी और सहिष्णु थे, वैचारिक सवालों पर उतने ही अडिग और दृढ़ थे। उन्होंने कई मार्क्सवादी बुद्धिजीवियों के साथ मिलकर ‘दासता की जंजीर’ (Chains of Servitude) नामक पुस्तक का सम्पादन भी किया जो आदिवासियों एवं दलितों की जिंदगी से जुड़ी हुई है। संगठन से जुड़ने के पूर्व उन्होंने असम राज्य के एक विश्वविद्यालय में एक प्राध्यापक के रूप में भी लगभग दो वर्षों तक अध्यापन किया। मूल रूप से भोजपुर जिले के निवासी कॉमरेड एसपी तिवारी अपने पिता द्वारा बनाए गए घर में गोड्डा में रह रहे थे और विगत कई महीनों से बीमार चल रहे थे।
1980 में मेरा उनसे वैचारिक सम्पर्क हुआ। मुझे लगभग एक दशक तक उनके सम्पर्क में रहने और ढ़ेर सारी बातें सीखने को मिलीं। वामपंथी एवं कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं के लिए वे एक आदर्श थे। उनका चला जाना वामपंथी एवं क्रांतिकारी आंदोलन के लिए एक गहरी क्षति है। दिल की गहराइयों से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं इन्कलाबी सलाम…..!




