देश की अर्थव्यवस्था को भोग का साधन बनाने वाले मोदी जी देश को नसीहत देना बंद करें महिलाओं के मंगलसूत्र को छीनने से प्रधानमंत्री बाज आवें

महिलाओं के मंगलसूत्र को छीनने से प्रधानमंत्री बाज आवें

देश की अर्थव्यवस्था को भोग का साधन बनाने वाले मोदी जी देश को नसीहत देना बंद करें

महिलाओं के मंगलसूत्र को छीनने से प्रधानमंत्री बाज आवें

आलेख–प्रभुराज नारायण राव

जे टी न्यूज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर घोर आपत्ति व्यक्त किया ।जिसमें उन्होंने देश के लोगों से सोना नहीं खरीदने की बात कही ।उन्होंने कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवाद के सरगना डोनाल्ड ट्रंप जो दुनिया का सबसे बड़ा शोषक है ।उसके शान वो शौकत में जलसा करना और उसे अपना मित्र कहना।क्या बराबरी का झूठी एहसास नहीं कराता था।आज का जो उनका बयान है ।वह अपनी औकात का एहसास करा रहा है। प्रधानमंत्री दुनिया के हर देश का भ्रमण करने के इच्छा रखते हैं और दुनिया में हर देश में अपने आन बान और शान में हाऊजी जैसे कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। जो प्रधानमंत्री अपने देश में नियमित बड़े-बड़े रोड शो, बड़ी-बड़ी सभाएं ही नहीं करते,बल्कि अपने बातों को लोगों तक पहुंचाने के लिए देश की सारी मीडिया को लगा देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो एक चाय बेचने वाले के रूप में देश के सामने आते हैं और सत्ता मिलते ही अपने को डी क्लास करके कॉरपोरेट की कतार में खड़े हो जाते हैं ,दिन में दो बार कपड़े बदलते हैं।20 लाख से कम का पोशाक नहीं पहनते हैं और दुनिया की हर सुख को हासिल करने के लिए कुछ भी करते हैं ।वह आज देश के लोगों को विदेशी मुद्रा को खर्च नहीं करने की बात करते हैं ।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की ।जो उन्हें शिव लोक में पहुंचाएगा और इस पूजा अर्चना के माध्यम से पुरानी घटनाओं की याद दिलाते हुए पूरे देश और दुनिया को नफरती बयान पहुंचाने का प्रयास करते हैं ।इसके लिए देश के सारे मीडिया को अपनी पूजा के एक-एक पल को लोगों तक पहुंचाने में लगा देते हैं। इतना ही नहीं इस मौके पर सैनिक विमान द्वारा कर्तव्य करवाते हैं। मंदिर के ऊपर हेलीकॉप्टरों से फूल और गुलाल छुड़वाते हैं। जिसमें अरबों रुपए एक पूजा करने में खर्च करते हैं ।वह प्रधानमंत्री चुनाव में चुनाव जीतने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ते ।पैसे को पानी के समान बहाते है।

प्रधानमंत्री जी अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में अपने को तटस्थ साबित करते हैं और युद्ध प्रारंभ होने के 2 दिन पहले इजराइल में जाकर वहां के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात करते हैं और उनके आने के 2 दिन बाद युद्ध ईरान पर थोप दिया जाता है। प्रधानमंत्री जी ईरान के राष्ट्रपति की हत्या पर एक शब्द भी दुख व्यक्त नहीं करते हैं। प्रधानमंत्री जी वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के अपहरण कर न्यूयॉर्क में बंदी बनाने पर भी एक शब्द नहीं बोलते हैं।

आज विधान सभा चुनाव जीतने के ठीक बाद देश की जनता को यह उपदेश देते हैं कि विदेशी मुद्रा को खर्च नहीं करें।प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि विपक्ष आपके मंगलसूत्र को भी छीन लेंगे।जो सोना एक-एक घर में कमजोर महिलाओं महिलाएं तक भी अपने श्रृंगार के रूप में रखना चाहती है ।आज आप बच्चों की शादी विवाह में सोना नहीं खरीदने का यानी मंगलसूत्र नहीं खरीदने का नसीहत दे रहे हैं ।प्रधानमंत्री जी आप एक बार भी अपने बनावटी दोस्त को इस सारे संकट के जिम्मेदार के विरुद्ध एक शब्द नहीं बोलते हैं। प्रधानमंत्री जी विदेशी तेल को खरीदने से मना कर रहे हैं।विदेश भ्रमर करने से मना कर रहे हैं। देश की जनता के खाने-पीने पहने के सामानों पर भी रोक लगाने की बात कर रहे हैं ।

लेकिन आप विदेश में शिक्षा लेने वाले, विदेशी वस्त्र को नियमित इस्तेमाल करने वाले, देशी मुद्रा को विदेश में ले जाने वाले जैसे नीतियों में सुधार करने की बात नहीं करते। आप कॉरपोरेट और बड़े पूंजीपतियों की सभ्यता और संस्कृति की शान में अनावश्यक खर्चे पर एक शब्द नहीं बोल रहे हैं ।आप देश की जनता के ऊपर बोझ डालने का काम ही करते रहे हैं। आप पेट्रोल और डीजल के महंगी होने से महंगाई की मार जो जनता पर पड़ रही है ,उस पर आप नियंत्रण की बात नहीं करते हैं ।गैस पर एक हजार रुपए प्रति व्यवसायिक सिलेंडर और 250 रुपए छोटे सिलेंडर पर बढ़ोतरी कर गरीबों और देश की जनता पर बढ़ रहे बोझ की कोई चिंता नहीं करते।लेकिन आप इस देश को विकसित राष्ट्र बनाने की तथाकथित काल्पनिक विश्वास लोगों के अंदर भरने का काम अपने सत्ता की लालच के लिए करते रहे हैं। असलियत से लाखों कोस दूर देश को रखते रहे हैं। देश की जनता को गुमराह करते रहे हैं और आपके लोग सुविधाओं को भोगने में लगे हुए हैं ।इस दोहरी नीति का त्याग कीजिए। तब देश के अर्थव्यवस्था और देश को बचाने के लिए लाल बहादुर शास्त्री जैसे प्रधानमंत्री बनने का साहस जुटाइए ।अन्यथा हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और को छोड़िए।

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