एबीवीपी की कार्यशाला में ‘एग्री विजन 2026’ का बैनर और कुलपति की अध्यक्षता पर उठते सवाल
एबीवीपी की कार्यशाला में ‘एग्री विजन 2026’ का बैनर और कुलपति की अध्यक्षता पर उठते सवाल

जे टी न्यूज़, समस्तीपुर/पूसा : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा आयोजित कार्यशाला में ‘एग्री विजन 2026’ का बैनर और डॉ. पी.एस. पाण्डेय (कुलपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय) की अध्यक्षता—दोनों ने मिलकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल सिर्फ कार्यक्रम के विषय या बैनर तक सीमित नहीं है, बल्कि अब विश्वविद्यालय की संस्थागत गरिमा और तटस्थता पर भी चर्चा होने लगी है। एक ओर, एबीवीपी एक छात्र संगठन है, जिसकी वैचारिक पहचान स्पष्ट मानी जाती है। दूसरी ओर, एक केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का ऐसे कार्यक्रम की अध्यक्षता करना स्वाभाविक रूप से निष्पक्षता के मानकों पर परखा जाता है।

आलोचकों का कहना है कि कुलपति जैसे संवैधानिक और शैक्षणिक पद पर बैठे व्यक्ति को किसी भी ऐसे मंच से दूरी बनाए रखनी चाहिए, जहां संगठनात्मक या वैचारिक झुकाव का आरोप लग सकता हो। विशेषज्ञ मानते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन का दायित्व अकादमिक वातावरण को निष्पक्ष, समावेशी और राजनीति से ऊपर रखना होता है। ऐसे में यदि कुलपति किसी छात्र संगठन के कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हैं,

तो यह संदेश जा सकता है कि संस्थान किसी विशेष विचारधारा के करीब है—जो उच्च शिक्षा के मूल सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है। हालांकि, समर्थकों का तर्क है कि यदि कार्यक्रम का विषय कृषि, नवाचार या छात्रों के करियर से जुड़ा है, तो कुलपति की भागीदारी को केवल शैक्षणिक सहयोग के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय प्रमुख का विभिन्न मंचों पर जाना संवाद और मार्गदर्शन का हिस्सा है, न कि राजनीतिक समर्थन। फिर भी, ‘एग्री विजन 2026’ जैसे अस्पष्ट बैनर और एबीवीपी जैसे संगठन की मौजूदगी के बीच कुलपति की अध्यक्षता ने औचित्य पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों की तटस्थता और विश्वसनीयता से जुड़ा व्यापक मुद्दा बनता जा रहा है।
अब जरूरत है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस पर स्पष्ट रुख रखे, ताकि शंकाओं और विवादों की स्थिति खत्म हो सके।



