नेल्सन मंडेला लालू प्रसाद यादव दुश्मनो के बिछाए जाल में फंस बन गए चारा चोर साभार: अभय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से
नेल्सन मंडेला लालू प्रसाद यादव दुश्मनो के बिछाए जाल में फंस बन गए चारा चोर
साभार: अभय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से

जे टी न्यूज़, नई दिल्ली : पूर्व मंत्री चाचा नरेंद्र सिंह दो चार बड़े पत्रकार और दो एनडीए विधायक और एक पूर्व सांसद एक साथ बैठे कर बातचीत कर रहे थे। मैं पहूँचा तो चाचा नरेंद्र सिंह का पीए बोला आप इंतजार कीजिए अभी कुछ विधायक और पूर्व सांसद सब बैठे हैं अंदर। 8-10 लोग बाहर इंतजार कर रहे थे। मैंने चाचा नरेंद्र सिंह को फोन लगा दिया चाचा ने फोन उठाए और बोले कहा रह गए मैं कहा बाहर खड़ा हूँ बोले अंदर आ जाओ। अंदर गया तो बगल में बैठाए। बातचीत में यूपी के एक बड़े नेता थे मुझसे पूछ पड़े अभय बताओ लालू प्रसाद यादव के बारे में क्या सोचते हों? मैंने कहा चारा चोर । चाचा नरेंद्र सिंह बोले अभय लालू चारा चोर नही हैं बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा जन नेता हैं समाजिक न्याय का मसीहा हैं भारत का नेल्सन मंडेला हैं। सदियो से सता पर एकाधिकार जमाए समूह वर्ग के कुछ खास लोगो के बिछाए जाल में फस गया लालू इसलिए आजके बाद अगर मुझे सम्मान करते हो तो कभी लालू को चारा चोर कहके पाप का भागीदार मत बनना। फिर चाचा नरेंद्र सिंह बताए की कैसे बचपन में उन्होने लालू प्रसाद यादव को हर तरह सें मदद किया था। आर्थिक कारणो सें लालू प्रसाद यादव राजनीति और आंदोलन बीच में छोड़ना चाहते थे लेकिन चाचा नरेंद्र सिंह ने लालू प्रसाद यादव को कहे लालू तुम नौकरी के लिए पैदा नही लिए तुम नौकरी दाता बनोगे।

चाचा नरेंद्र सिंह विस्तार से बताए कैसे उत्तर भारत के नेल्सन मंडेला लालू प्रसाद यादव दुश्मनो के बिछाए जाल में साफ ह्रदय और निश्छल इंसान होने के कारण दुसरो के पाप को साफ करने के चक्कर में निर्दोष होते राजनीतिक सडयंत्र में फस कर चारा चोर का टैग अपने उपर लगवा लिया। चाचा नरेंद्र सिंह जनता दल के सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे और एकमात्र केबीनेट मंत्री जो लालू कह कर बुलाते थे। लालू प्रसाद यादव के केबीनेट से चाचा नरेंद्र सिंह सबसे पहले इस्तीफा दिया लालू से मतभेद के कारण नही बल्कि लालू प्रसाद यादव उन्ही वैचारिक लोगो से घिरते जा रहे थे जिन वैचारिक लोगो के खिलाफ लड़ कर जनता दल सता में आयी थी। संघी गिरोह दलित प्रदेश अध्यक्ष को हटाना चाहता था लेकिन चाचा नरेंद्र सिंह दलित प्रदेश अध्यक्ष जो पूर्व सीएम थे के पक्ष में खड़े होकर एक दलित पूर्व सीएम के लिए केबीनेट मंत्री पद से उस समय इस्तीफा दिया जिस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव का लहर था, लेकिन लालू जी विधान सभा भंग होने तक इस्तीफा मंजूर नही किया। उसके बाद भी लालू प्रसाद यादव के साथ नरेंद्र सिंह का व्यक्तिगत संबंध बहुत मजबूत रहा लेकिन राजनीतिक संबंध कभी नही और नही कभी टिकट के लिए गये। 1995 में नरेंद्र चाचा जमुई और चकाई दोनो जगह से बहुत कम वोट से हारे 1278, 340 के अंतर सें। उसके बाद क्षेत्र में बने रहे 2000 में चकाई और जमुई दोनो जगह से रिकॉर्ड वोट सें जिते। नरेंद्र चाचा कहते थे पुरे राजनीतिक जीवन का अनुभव हैं Lalu Prasad Yadav राजपूत समाज का सबसे बड़ा हितैषी और आदर और सम्मान देने वाला तथा उचीत राजनीतिक हिस्सेदारी देने वाला नेता हैं।चाचा नरेंद्र सिंह कह रहे थे 90-2005 के बीच सबसे ज्यादा केबीनेट मंत्री राजपूत हुआ। 2004 में दो केंद्रीय मंत्रालय में से एक मंत्रालय राजपूत को दिया।चा

चा नरेंद्र सिंह बोले अभय 2005 अभी तक देखो राजपूत नेताओ का कितना मान सम्मान हैं एनडीए में? उसके बाद सें मैं लालू प्रसाद यादव जी के प्रति कुछ नही बोलता। लेकिन तेजस्वी यादव लालू नही हो सकता कभी भी ये मानता हूँ। चाचा नरेंद्र सिंह लालू प्रसाद यादव से वैचारिक राजनीतिक लड़ाई लडते रहे लेकिन व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप और आक्षेप लगाने की लड़ाई कभी नही।


