मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न
आरपीसीएयू, पूसा के मत्स्यकी महाविद्यालय ढोली में 9 तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित, प्रशिक्षुओं को वितरित किए गए प्रमाण पत्र
मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीक पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न
आरपीसीएयू, पूसा के मत्स्यकी महाविद्यालय ढोली में 9 तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित, प्रशिक्षुओं को वितरित किए गए प्रमाण पत्र

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा अंतर्गत मत्स्यकी महाविद्यालय, ढोली में अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आयोजित तीन दिवसीय जागरूकता-सह-व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम “मीठे पानी में मोती संवर्धन तकनीकों का प्रदर्शन” का सफल समापन हुआ। 14 से 16 मई 2026 तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 9 तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जिसमें मोती की खेती, सीप चयन, नाभिक प्रत्यारोपण, जल गुणवत्ता प्रबंधन, क्लोरेला उत्पादन तथा एकीकृत मत्स्य-मोती पालन जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 14 मई को हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. आर. सुब्बैया, डीन, सीएईटी, आरपीसीएयू, पूसा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मत्स्यकी महाविद्यालय, ढोली के अधिष्ठाता डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने की। स्वागत भाषण एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. पी. पी. श्रीवास्तव ने कहा कि मोती संवर्धन ग्रामीण महिलाओं के लिए आयवर्धन का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
उद्घाटन सत्र में डॉ. जी. एन. झा एवं डॉ. शिवेंद्र कुमार ने भी संक्षिप्त टिप्पणियां प्रस्तुत कीं। धन्यवाद ज्ञापन चांदनी रॉय दत्त ने किया। तकनीकी सत्र में डॉ. जी. एन. झा ने मोती की खेती अवधारणाएं, प्रथाएं एवं महत्व विषय पर विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद डॉ. तनुश्री घोड़ई ने मोती उत्पादन के लिए स्वस्थ सीपियों के चयन की वैज्ञानिक तकनीकों पर प्रकाश डाला। तीसरे सत्र में मोती की खेती में उद्यमिता विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। वहीं व्यावहारिक सत्र में अभिलिप्सा बिस्वाल एवं राम कुमार कुर्मी ने नाभिक तैयारी की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
दूसरे दिन रोशन कुमार राम ने क्लोरेला की बड़े पैमाने पर खेती की व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद डॉ. अदिता शर्मा ने मसल्स में नाभिक प्रत्यारोपण की मानक प्रक्रियाओं की जानकारी दी। डॉ. एस. के. नायक ने पूर्व-सावधानियों एवं शल्यक्रियाोत्तर उपायों पर प्रशिक्षण दिया, जबकि डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने जल गुणवत्ता मानकों के महत्व को व्यावहारिक रूप में समझाया।

तीसरे दिन डॉ. शिवेंद्र कुमार ने मछली एवं मीठे पानी के मोती की एकीकृत खेती की संभावनाओं पर व्याख्यान दिया। इसके बाद प्रतिभागियों को पर्ल यूनिट, कोर ऑफ फायर, ढोली का भ्रमण कराया गया, जहां डॉ. गुलशन कुमार एवं राम कुमार कुर्मी ने प्रशिक्षण से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी और प्रतिभागियों से फीडबैक लिया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के नियंत्रक उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव एवं परियोजना की प्रधान अन्वेषिका डॉ. अदिता शर्मा ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अदिता शर्मा ने किया।
मत्स्य संसाधन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्यामनाथ झा ने परियोजना के उद्देश्य एवं लाभों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण महिलाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त करेगा।

मौके पर महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारीगण में डॉ. राजीव कुमार ब्रह्मचारी, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. प्रवेश कुमार, डॉ. मोगलेकर एच. एस., डॉ. तनुश्री घोड़ई, रोशन कुमार राम, डॉ. एस. विद्या सागर सिंह, डॉ. गुलशन कुमार, डॉ. अभिलाष थापा, सनाईमा सिंघा, अभिलिप्सा बिस्वाल, अधिष्ठाता के निजी सहायक डॉ. राजेश कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी सुधीर कुमार, शशिकला सहित अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।