समस्तीपुर में इंदिरा आवास योजना में बड़ा खेल? बिना एक ईंट लगाए निकाल ली पूरी राशि”, आवास सहायक पर गंभीर आरोप
समस्तीपुर में इंदिरा आवास योजना में बड़ा खेल?
बिना एक ईंट लगाए निकाल ली पूरी राशि”, आवास सहायक पर गंभीर आरोप

जे टी न्यूज़, समस्तीपुर : जिले के पूसा प्रखंड अंतर्गत महमदा पंचायत में इंदिरा आवास योजना में बड़े घोटाले और पैसे की बंदरबांट का मामला सामने आया है। लगातार दो अलग-अलग आवेदन और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से अब प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि आवास योजना गरीबों को घर देने के बजाय “पैसा वसूली और फर्जी लाभार्थियों” का जरिया बन चुकी है।
मामला महमदा पंचायत वार्ड संख्या-03 का है, जहां लाभार्थी सुनीला देवी के नाम पर वर्ष 2021-22 में इंदिरा आवास योजना के तहत ₹1.20 लाख की राशि तीन किश्तों में जारी कर दी गई। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन पर एक भी ईंट नहीं रखी गई, फिर भी पोर्टल पर आवास को “पूर्ण” दिखा दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत के अनुसार आवास निर्माण से जुड़ी मजदूरी की राशि भी निकाल ली गई, जबकि घर का निर्माण हुआ ही नहीं

रोप सीधे आवास सहायक और संबंधित अधिकारियों पर लगाए गए हैं कि मिलीभगत कर राशि की निकासी कर गबन किया गया। इस मामले को लेकर पहले 2 दिसंबर 2025 को उप विकास आयुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बाद हाल ही में जिला पदाधिकारी को दोबारा आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि महीनों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि “ऊपर तक पैसे का खेल” चल रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आवास योजना में नियम-कानून को ताक पर रखकर लाभार्थियों का चयन किया जा रहा है। जिन गरीबों को वास्तव में घर की जरूरत है, वे दर-दर भटक रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को पैसे लेकर योजना का लाभ दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि “आवास सहायक पहले पैसे की मांग करता है, फिर उसका बंदरबांट नीचे से ऊपर तक होता है।” आरोप यह भी है कि बिना रिश्वत दिए न नाम जुड़ता है और न ही योजना की राशि समय पर मिलती है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी पोर्टल पर बिना निर्माण के आवास को पूर्ण कैसे दिखा दिया गया? क्या केवल कागजों पर ही गरीबों के घर बन रहे हैं? और अगर शिकायतें सही हैं, तो अब तक दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे आवास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या मामला फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा।
