एक व्यक्ति का मल देखकर भी उसका चरित्र, चेहरा, भाग्य आदि पकड़ा जा सकता है: श्री श्री ठाकुर
एक व्यक्ति का मल देखकर भी उसका चरित्र, चेहरा, भाग्य आदि पकड़ा जा सकता है: श्री श्री ठाकुर
जे टी न्यूज,रामगढ़वा पूर्वी चंपारण-
कल्कि अवतार, अवतारी एवं कारण पुरुष, सद्गुरु, युग पुरुषोत्तम, परम प्रेममय श्रीश्रीठाकुर अनुकुलचंद्र जी ने एक दिन कहा था, *एक व्यक्ति का मल देखकर भी उसका चरित्र, चेहरा, भाग्य आदि पकड़ा जा सकता है।* सब कुछ कार्य-कारण संबंध से जुड़ा हुआ है। फिर जगत में कोई भी चीज विच्छिन्न नहीं है। *किसी एक चीज को आधार बनाकर, विश्लेषण और संश्लेषण के सहारे विवर्तन का आदि, अंत प्रत्यक्ष किया जा सकता है।* इसमें अलौकिकता कुछ भी नहीं है। *सर्वकारण जो हैं, उन्हें जान लेने पर कुछ भी जानना बाकी नहीं रहता।*
उन्होंने कहा है कि कारण-भूमि में पहुँच जाने पर किसी व्यक्ति को देखकर उसका *भूत, भविष्य, वर्तमान सिनेमा की तरह दिखाई देता है।* कितने लोगों को देखकर पता चल जाता है कि उनके सामने क्या विपत्ति आ रही है। अप्रत्यक्ष रूप से सावधान कर देता हूँ जिससे विपत्ति टल सके। *लेकिन अधिकांश लोगों का टान — खिंचाव मुझ पर इतना प्रबल नहीं है कि प्रवृत्ति का झोंक छोड़कर मेरी बात के अनुसार चलकर दुर्भोग टाल सके और सपरिवेश स्वस्ति पा सके, तथा मुझे भी उद्वेगमुक्त रख सके। मेरी जो पीड़ा है, उसे कोई नहीं समझता।*
श्री श्री ठाकुर जी ने कहा है कि प्रत्येक के भीतर से हर समय एक सूक्ष्म विकिरण निकलता है। उसे देखकर उसकी तात्कालिक प्रवृत्ति पकड़ में आ जाती है। *एक-एक प्रकृति का एक-एक रंग होता है — लाल, सफेद, धुएँ जैसा, काला, गाढ़ा, निष्प्रभ, टिमटिमाता — कितने तरह के रंग।* उसे देखकर शरीर-मन का तात्कालिक विकार और व्याधि समझ में आता है। किसकी गति, प्रकृति, परिणति क्या है, वह भी पकड़ में आ जाता है। *इन सबकी प्रधान औषधि है नाम, इष्टानुराग, इष्ट-स्वार्थ प्रतिष्ठा।*
साभार -एसपीआर प्रेम कुमार सिंह दादा देवघर।
( “स्मृति-तीर्थे” = सर्वज्ञत्व बीज (23), प्रफुल्ल कुमार दास


