समस्तीपुर में डबल मर्डर से मचा हड़कंप, पुलिस पर फिर उठे सवाल चर्चित शराब कारोबारी प्रभात चौधरी और साथी की गोलियों से भूनकर हत्या,
समस्तीपुर में डबल मर्डर से मचा हड़कंप, पुलिस पर फिर उठे सवाल
चर्चित शराब कारोबारी प्रभात चौधरी और साथी की गोलियों से भूनकर हत्या,

समस्तीपुर। जिले के चकमेहसी थाना क्षेत्र के नामापुर गांव में देर रात हुई सनसनीखेज डबल मर्डर की वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया है। बेखौफ अपराधियों ने मंगलवार की रात ताबड़तोड़ फायरिंग कर चर्चित शराब कारोबारी प्रभात चौधरी और उसके साथी सन्नी कुमार की निर्मम हत्या कर दी। इस घटना ने एक बार फिर जहां एक तरफ समस्तीपुर पुलिस के सुरक्षा और चौकसी के तमाम दावों की पोल खोल दी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया कार्यशैली और पुलिस के अपराध नियंत्रण की इच्छाशक्ति और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नामापुर गांव के पास सुनसान इलाके में पहले से घात लगाए अपराधियों ने दोनों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। दोनों को दर्जनभर से अधिक गोलियां मारी गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर आराम से फरार हो गए, और पुलिस हमेशा की तरह बाद में पहुंचकर खानापूर्ति में जुटी नजर आई।
घटना की सूचना मिलने के बाद चकमेहसी थानाध्यक्ष समेत वरीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से तीन लोडेड मैग्जीन और कई खोखे बरामद किए हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि अपराधियों ने पूरी तैयारी के साथ इस हत्याकांड को अंजाम दिया।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस हत्याकांड के पीछे शराब कारोबार में वर्चस्व की लड़ाई और पैसों के लेन-देन का विवाद प्रमुख कारण हो सकता है। गौरतलब है कि मृतक प्रभात चौधरी पर पहले से ही शराब तस्करी और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज थे। वर्ष 2023 में न्यायालय परिसर में भी उस पर जानलेवा हमला हो चुका था, जो इस बात का संकेत है कि वह लंबे समय से आपराधिक विवादों में घिरा हुआ था

मृतक के पिता संजय कुमार चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे को किसी ने फोन कर बुलाया था, जिसके बाद वह घर से निकला और फिर उसकी हत्या की खबर मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले हुए हमले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही थी, जिसके चलते दो पुलिसकर्मी निलंबित भी किए गए थे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक ऐसा व्यक्ति, जिस पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हों और जिस पर पहले हमला हो चुका हो, उसकी सुरक्षा को लेकर पुलिस कितनी गंभीर थी? क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा था?
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की खुली पोल है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम गोलियां बरसा कर दोहरी हत्या कर देते हैं और पुलिस महज मूकदर्शक बनी रहती है।

फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है और इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या केवल तैनाती और जांच से अपराध पर लगाम लगेगी, या फिर प्रशासन को अपनी कार्यशैली में ठोस बदलाव लाना होगा?



