जुस्तजू के साये
जुस्तजू के साये

जे टी न्यूज
कहे मतवारा जिया,
फिर जला उम्मीद का दीया।
फड़फड़ाये जब भी लौ,
देना मत माननीय संयम खो।
डाल धैर्य रूपी तेल,
करे रोशनी अंधकार फेल।
सूर्य किरणों की भांति,
बांटेगा सुख, समृद्धि, शांति।
छेड़कर नव उमंग,
बजाता हृदयेश्वर में मृदंग।
आस दीपक है कामना,
जले सदैव बिना अवमानना।
हो तेरा या मेरा घर,
फैले उजाला बन दिनकर।
नहीं, कभी बुझने पाये,
“गिल” जुस्तजू के हसीं साये।
नवनीत गिल
एम.ए (इतिहास,राजनीति शास्त्र), बी.एड, एम.एड, एल.एल.बी।
पूर्व प्राचार्य
सीबीएसई विद्यालय (उत्तर प्रदेश)।

