मार्क्सवादी सिद्धांत के प्रकांड विद्वान थे–सीताराम येचुरी
मार्क्सवादी सिद्धांत के प्रकांड विद्वान थे–सीताराम येचुरी

जे टी न्यूज़, बेतिया : माकपा के बिहार राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रभुराज नारायण राव ने बताया कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के 2015 से सचिव पद पर तीन बार निर्वाचित रहे आजीवन महासचिव ,पूर्व पोलिट ब्यूरो सदस्य,एस एफ आई के पूर्व अध्यक्ष,पूर्व राज्यसभा सदस्य ,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के तीन बार अध्यक्ष रहने वाला पहला व्यक्ति,साम्यवाद के प्रख्यात वक्ता ,वैज्ञानिक अर्थशास्त्र के जानकार, अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन के उच्च श्रेणी के नेताओं में से एक कामरेड सीताराम येचुरी थे।
का. सीताराम येचुरी का जन्म 12 अगस्त 1952 को चेन्नई में हुआ था।उनके पिता सड़क परिवहन में अभियंता के रूप में कार्यरत थे ।उनकी मां भी सेवा में थी।1971 में वे दिल्ली आ गए।दिल्ली विश्वविद्यालय के संत स्टीफेन कॉलेज में वे दाखिला लिए।उच्च शिक्षा लेने के लिए वे जे एन यू दिल्ली में दाखिला लिए।1975 में आपातकाल में गिरफ्तार भी हुए थे। जिसके चलते उन्हें पी एच डी की डिग्री नहीं मिल पायी थी।1977 में मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी जब इंदिरा गांधी जे एन यू दिल्ली की कुलाधिपति (चांसलर) पद से इस्तीफा नहीं दे रही थी।तब वे 5 सितंबर 1977 को जे एन यू दिल्ली से उनके निवास तक एक विशाल छात्रों का जुलूस लेकर प्रदर्शन किये।काफी जद्दोजहद के बाद तत्कालीन गृह मंत्री ओम मेहता के साथ इंदिरा गांधी बाहर आयी।का. सीताराम ने एक स्मार पत्र इंदिरा गांधी को पढ़ कर सुनाया।उन्होंने जे एन यू में किये गये दमनात्मक कार्रवाइयों का जिम्मेवार ठहराते हुए कुलाधिपति पद से उनके इस्तीफे की मांग की।इंदिरा गांधी मुस्कुराती रही और सीताराम येचुरी की गिरफ्तारी भी हुई।लेकिन इंदिरा गांधी को इस्तीफा देना पड़ा था।का. सीताराम येचुरी का बड़ा ही सहज व्यक्तित्व था।लेकिन वे निर्मम योद्धा थे।वे कठिन से कठिन परिस्थिति को बड़े ही आसानी से हल कर देते थे।वे बड़े ही हंसमुख थे।
का. सीताराम येचुरी अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति को मार्क्सवादी नजरिए से देखने और उसके समाधान के सजग प्रहरी थे।वे मार्क्सवादी अर्थशास्त्र और द्वंद्वात्मक भौतिवाद के मूर्धन्य ज्ञाता थे।वे वैज्ञानिक समाजवाद को भारत में लागू करने के हिमायती थे।
का. सीताराम येचुरी धर्म को आत्मा और परमात्मा के बीच की कड़ी मानते थे।जिसका राजनीतिक करण के घोर विरोधी थे।जब वे राज्य सभा में बोलने के लिए खड़े होते थे।तो पक्ष और विपक्ष शांत हो उनकी बातों को सुनते थे।वे केंद्र बनने वाले संविद सरकारों के कुशल नेतृत्वकारी भूमिका में सदैव रहे।का. सीताराम येचुरी मृदुल भाषी ही नहीं थे।बल्कि उनके वैज्ञानिक विश्लेषण के लोग कायल थे।

का. सीताराम येचुरी से मेरी पहली मुलाकात अक्टूबर 1978 में हुई थी।उनके कहने पर मैं जे एन यू दिल्ली छात्र संघ के अध्यक्ष के कार्यालय में गया।वहां हो रहे राजनीतिक चर्चाओं को सुनता रहा।1974 छात्र आंदोलन में शामिल बेतिया के अरुण कुमार सिन्हा जे एन यू में पढ़ाई के दौरान एस एफ आई की जे एन यू दिल्ली की यूनिट के सदस्य बने।1979 में फ्री थिंकर छात्र संगठन की एक छात्रा के साथ दूर व्यवहार के कारण उन्हें एस एफ आई से निष्कासित कर दिया गया।जिसका इल्जाम सीताराम येचुरी पर लगाते हुए उन्होंने मुझसे उस समय कहा था कि वह एक दिन सी पी आई (एम) का पोलिट ब्यूरो सदस्य बनेगा।का. सीताराम से विचारधारात्मक संबंध के साथ साथ आत्मीय संबंध भी थे।उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि।
