भगत सिंह एवं डॉ भीमराव अम्बेडकर के मूर्ति पर माल्यार्पण से जसम बिहार का 7वां राज्य सम्मेलन समस्तीपुर कालेज में शुरू
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सत्ता के खिलाफ संघर्ष का शंखनाद किया
भगत सिंह एवं डॉ भीमराव अम्बेडकर के मूर्ति पर माल्यार्पण से जसम बिहार का 7वां राज्य सम्मेलन समस्तीपुर कालेज में शुरू
प्रसिद्ध आलोचक कौशल किशोर बतौर मुख्य वक्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सत्ता के खिलाफ संघर्ष का शंखनाद किया
जसम जिलाध्यक्ष डॉ प्रभात कुमार ने आगत अतिथियों का स्वागत किया

जे टी न्यूज़, समस्तीपुर : जन संस्कृति मंच (जसम) का 7वां बिहार राज्य सम्मेलन शनिवार को शहीद-ए-आजम भगत सिंह एवं संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद शहीद गीत के साथ समस्तीपुर कालेज सभागार में शुरू हुआ। सम्मेलन का मंच जनकवि सुरेंद्र प्रसाद व सभागार जनकवि महेश्वर के नाम पर रखा गया है। वहीं दो दिवसीय कार्यक्रम के सम्मेलन स्थल का नाम रामचंद्र राय – रामचंद्र आरसी नगर रखा गया है।
सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध जनकवि मदन कश्यप ने करते हुए कहा कि फासीवादी प्रवृतियों का हमें जीवन के हर स्तर पर विरोध करना चाहिए और सभी तरह के सुप्रीमों संस्कृति के विरूद्ध लोकतांत्रिक व जनवादी केन्द्रीयता की परम्परा को कायम रखने के लिए सदैव संघर्ष करना चाहिए। वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थिति में हमें खतरे को पहचानने और उनसे निपटने का एक मात्र तरीका जनता का आंदोलन है।
बतौर मुख्य वक्ता लखनऊ से आये जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं कवि-आलोचक कौशल किशोर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि फासीवाद के भारतीय संस्करण से संघर्ष के लिए भगत सिंह हमारे पथ प्रदर्शक हैं जो फासी के फंदे को चुमने से पहले लेनिन को पढ़ रहे थे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ से आये जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध आलोचक सियाराम शर्मा ने कहा कि भारतीय फासीवाद टेक्स्टबुक फासीवाद है जिसका खात्मा जनता की चेतना को समृद्ध अथवा प्रगतिशील व वैज्ञानिक बनाए बगैर संभव नहीं है जिसके लिए जन संस्कृति मंच जैसे संगठन का महत्व और कार्यभार और भी बढ़ जाता है।
मुख्य अतिथि के रूप में जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में जेनजी आंदोलन ने फासीवादी सत्ता के प्रचार के तरीकों को मात देते हुए लोकतंत्र, संविधान, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रगतिशील विचारों को प्रतिस्थापित किया है।
प्रसिद्ध कवि सह जसम के समस्तीपुर जिलाध्यक्ष डॉ प्रभात कुमार ने सम्मेलन में स्वागत भाषण देते हुए कहा कि कलाकारों और लेखकों को जनसाधारण के फासीवद के खिलाफ संघर्ष को अपना योगदान देना चाहिए।
उन्होंने जनतंत्र को खतरे में बताते हुए कहा कि सत्ताधारियों द्वारा इसे नष्ट कर देने की साजिश को शिकस्त देने में उन्हें जनसाधारण के साथ होना चाहिए। स्वतंत्रता, न्याय और बराबरी के लिए संघर्ष को भी उनकी जरूरत है।
विदित हो कि दो दिवसीय राज्य सम्मेलन में व्यापक भागीदारी है। डेलीगेट, पर्यवेक्षक और अतिथियों सहित लगभग 125 से अधिक रंगकर्मी, साहित्यकार, कलाकार, चित्रकार और जनगायक सम्मेलन में बतौर डेलीगेट उपस्थित हैं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि-कथाकार- आलोचक जितेंद्र कुमार, कवि-आलोचक प्रो. सुरेंद्र प्रसाद सुमन, बुद्धिजीवी प्रो. संतोष कुमार और उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. अहमद सगीर की अध्यक्ष मंडली ने की। मंच पर वरिष्ठ रंगकर्मी-जनगायक कृष्ण कुमार निर्मोही, वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल अंशुमान, प्रमोद यादव, वरिष्ठ रंग-समीक्षक रामबाबू आर्य और तबस्सुम फरहाना की गरिमामयी उपस्थिति है। उद्घाटन सत्र का संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी-कवि दीपक सिन्हा ने किया। इस अवसर पर दीपक सिन्हा के नये काव्य-संग्रह “ब्लैक स्पाॅट” का लोकार्पण भी उद्घाटन सत्र में किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है। इस अवसर पर एक आर्ट गैलरी लगाई गई है जिसमें जनवादी कलाकारों की कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई है, साथ ही एक बुक स्टॉल भी लगाई गई है जहाँ प्रगतिशील साहित्य उपलब्ध है। उद्घाटन सत्र के बाद संध्या में काव्य-गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन किया गया है जिसका संचालन वरिष्ठ कवि शंभु भारतीय ने किया। बेगूसराय की प्रसिद्ध टीम रंगनायक-द लेफ्ट थियेटर द्वारा एक नाटक की प्रस्तुति की गई। भोजपुर और मिथिला जोन से कई जनगायक अपनी प्रस्तुति दिये। मधुबनी की जनगायन टीम नवतुरिया, रोहतास की टीम ललकार और आरा की चर्चित युवा टीम युवानीति की विशेष प्रस्तुति भी जारी है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन प्रमोद यादव, विजय सिन्हा एवं पुनीत पाठक कर रहे हैं। सम्मेलन जारी है। उक्त आशय की जानकारी शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दी।