शारदा सिन्हा की 74वीं जयंती पर एलएनएमयू में गीतों के माध्यम से दी गई संगीतमय श्रद्धांजलि
विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शारदा सिन्हा के कालजयी लोकगीत
शारदा सिन्हा की 74वीं जयंती पर एलएनएमयू में गीतों के माध्यम से दी गई संगीतमय श्रद्धांजलि
विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शारदा सिन्हा के कालजयी लोकगीत

जे टी न्यूज, दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के ललित कला संकाय अंतर्गत विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में पद्मविभूषण डॉ. श्रीमती शारदा सिन्हा की 74वीं जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन पद्मविभूषण शारदा सिन्हा चेयर के अंतर्गत किया गया।
समारोह की शुरुआत विभागीय शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. शारदा सिन्हा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद विभाग के छात्र-छात्राओं ने शारदा सिन्हा के लोकप्रिय एवं कालजयी लोकगीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उन्हें संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की।
विद्यार्थियों ने ‘केलवा के पात पर…’, ‘जगदंबा घर में दियरा…’, ‘आठ ही काठ के…’ तथा ‘हे गंगा मैया…’ सहित उनके प्रसिद्ध गीतों की प्रस्तुति दी। लोकगीतों की इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने बिहार की समृद्ध लोक-संगीत परंपरा और शारदा सिन्हा के योगदान को याद किया। प्रस्तुतियों ने समारोह के वातावरण को भावपूर्ण एवं संगीतमय बना दिया।
‘शारदा सिन्हा की गायकी में दिखती है बिहार की लोक संस्कृति’
समारोह को संबोधित करते हुए संगीत एवं नाट्य विभाग की विभागाध्यक्ष सह संकायाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ ने कहा कि यह विभाग के लिए गौरव का विषय है कि पद्मविभूषण डॉ. शारदा सिन्हा ने इसी विभाग से विद्या वाचस्पति (पीएच.डी.) की उपाधि प्राप्त की थी और आज उनके नाम से विभाग में पद्मविभूषण शारदा सिन्हा चेयर स्थापित है।
उन्होंने कहा कि शारदा सिन्हा के गीतों को विद्यार्थियों द्वारा उसी लोकभाव और संवेदना के साथ प्रस्तुत करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि शारदा सिन्हा ने लोक तत्वों को अपनी गायकी में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी गायकी में बिहार की लोक संस्कृति, परंपरा और जनजीवन की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है।
प्रो. सिंह ने कहा कि शारदा सिन्हा के गीतों ने बिहार की लोक-संगीत परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गायकी की विशिष्टता आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

समारोह में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. पुष्कर झा एवं डॉ. अभिषेक स्मिथ सहित विभागीय कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावपूर्ण एवं यादगार बना दिया।

