जिला प्रबंधक पर भ्रष्टाचार, नियमों को अनदेखी करने का आरोप ,पूर्व जिला अधिकारी दिवेश सेहरा ने दिया जांच, प्राथमिक करने का आदेश .

जिला प्रबंधक पर भ्रष्टाचार, नियमों को अनदेखी करने का आरोप ,पूर्व जिला अधिकारी दिवेश सेहरा ने दिया जांच, प्राथमिक करने का आदेश . समस्तीपुर::- बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड. समस्तीपुर के जिला प्रबंधक के सांठ गांठ से टीपीडीएस और डी.एस. डी. के गोरखधंधा से करोड़ों रुपए की गवन किए जाने की सनसनी […]

जिला प्रबंधक पर भ्रष्टाचार, नियमों को अनदेखी करने का आरोप ,पूर्व जिला अधिकारी दिवेश सेहरा ने दिया जांच, प्राथमिक करने का आदेश .

समस्तीपुर::- बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड. समस्तीपुर के जिला प्रबंधक के सांठ गांठ से टीपीडीएस और डी.एस. डी. के गोरखधंधा से करोड़ों रुपए की गवन किए जाने की सनसनी समाचार प्रकाश में आया है.

जिला प्रबंधक समस्तीपुर, टीपीडीएस और डीएसडी के मेल से पीडीएस के दुकानदारों तक खाद्यान्न गेहूं और चावल खुले बाजार में बेचे जाने की चर्चा जोडो पर है .

 

.जिला प्रशासन को कई बार सूचना दिए जाने के बाद भी चुप्पी साधना जिला प्रशासन पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगता है. जिला प्रबंधक ने. जिलाधिकारी समस्तीपुर और प्रबंधक निर्देशक राज्य खाद्य निगम, मुख्यालय पटना को बिना सूचना दिए है, डी. एस. डी को एकरनामा समाप्ति के बाद नियम कानून को ताक पर रखकर अवधि विस्तार किए जाने की भी चर्चा है .यह चर्चा है कि जिला प्रबंधक ने पांच निविदार्धारक को बिना बैंक गारंटी की जांच पड़ताल किए है, पूर्व के निविदा में डी एस डी और टीपीडीएस को स्वीकृति प्रदान कर एवज में समस्तीपुर बिहार राज्य खाद्य एवं और सैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के कार्यालय के नाम पर बिल भुगतान में पांच से 10% कमीशन के रूप में वसूल किये जाने की चर्चा है ,जबकि इसकी जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि इस गोरखधंधे से आई कमीशन में मंत्री से लेकर समस्तीपुर जिला अधिकारी समेत संबंधित निगम के आला अधिकारी तक पहुंचाने के बात सामने आई है. इस बीच महाप्रबंधक जन वितरण निगम मुख्यालय पटना ने अपने पत्रांक2:15:72:1:2018/10826 दिनांक 22 अगस्त 2019 को माध्यम जिला प्रबंधक समस्तीपुर को तीन दिनों के अंदर जवाब मांगा है, पूर्व जिला अधिकारी समस्तीपुर श्री देवेश सेहरा ने निविदा नहीं निकालने के लिए कौन कौन दोषी है,उन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था .लोकसभा चुनाव के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी दिवेश सेहारा का तबादला हो जाने का कारण मामला कूड़ेदान में फेक दिया गया .