संवाद सफर *गांव जहां होली नहीं होती *शिव कुमार राय, वरिष्ठ पत्रकार

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संवाद सफर

*गांव जहां होली नहीं होती *
शिव कुमार राय वरिष्ठ पत्रका
पटना: रंगो का पर्व होली के मौके पर जहां एक ओर सामान्य जन आपसी गिले -शिकवे भूलकर एक दूसरे के साथ गले मिलते है, रंग-गुलाल लगाते है,घरों में अच्छे -अच्छे पकवान बनते है वहीं कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां होली पर्व नहीं मनती या फिर नहीं मनायी जाती इसके कारण भी अलग -अलग है।
ऐसा ही एक गांव है बिहार के मुंगेर जिला अंतर्गत असरगंज का सती स्थान गांव जहां पिछले दो सौ वर्षो से होली नहीं मनायी जाती इस गांव के पड़ोसी गाँवों मे जहां होली के रोज उमंगो -खुशियो की बरसात होती वहीं सती स्थान गांव मे सन्नाटा पसरा रहता• यह परम्परा आज भी इस गांव मे कायम है• किसी भी ग्रामीण मे इस बात का साहस नही होता कि वे होली के रोज अपने घरों मे होली खेले या फिर उनके घरों मे गृहणियां विशेष पकवान बनाएं
उक्त गांव मे होली नही मनाने के पीछे जो लोक कथा प्रचलित है, उसके अनुसार तकरीबन दो सौ वर्ष सती नाम की एक महिला के पति की अकाल मौत होली के रोज ही हुई थी• मृतक की अंतिम क्रिया गांव मे ही संपन्न कराया गया• इसी दौरान सती ने भी उसी चिता में कूद कर अपनी जान दे दी• इस घटना का प्रभाव ग्रामिणों पर इतना पड़ा कि उसी रोज़ होली पर्व यहां मनाना बंद हो गया• कुछ साल पहले होली के रोज सती स्थान गांव में एक नव विवाहित महिला ने जब अपने घर में पकवान बनाने की कोशिश की तो उनके घर में अचानक आग लग गई इसे दैविक घटना मानते हुए फिर कोई अन्य महिला पुआ – पूड़ी बनाने की साहस नहीं की और न ही तो किसी पुरुष द्वारा होली की हुड़दंग मचाने की साहस की•सती स्थान गांव के निकट वर्ती दो अन्य गाँवों बबुनिया और छोटी कोरियन छावनी में भी होली नहीं मनायी जाती•

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