लोकनायक के पंचायती राज दृष्टिकोण पर 11 अक्टूबर को दिल्ली में मंथन
एवार्ड और प्रयास मिलकर करेंगे विशेष कार्यक्रम, सामाजिक सरोकारों पर भी साथ काम करने का निर्णय
लोकनायक के पंचायती राज दृष्टिकोण पर 11 अक्टूबर को दिल्ली में मंथन
एवार्ड और प्रयास मिलकर करेंगे विशेष कार्यक्रम, सामाजिक सरोकारों पर भी साथ काम करने का निर्णय 
जे टी न्यूज़
दिल्ली, 10 सितंबर। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर पंचायती राज व्यवस्था में उनके योगदान और दृष्टिकोण पर नई दिल्ली में विशेष मंथन होगा। भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण एवं पद्म विभूषण कमलादेवी चट्टोपाध्याय द्वारा स्थापित एसोसिएशन ऑफ वालंटियरी एजेंसिज फॉर रूरल डेवलपमेंट (एवार्ड) और प्रयास संस्था के संयुक्त सहयोग से 11 अक्टूबर को इंडिया हैबिटेट सेंटर में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
कार्यक्रम की तैयारियों और दोनों संस्थाओं के बीच भविष्य के सहयोग को लेकर एवार्ड के कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रयास संस्था के संस्थापक एवं पूर्व पुलिस महानिदेशक आमोद कंठ, पूर्व सहायक आयुक्त दिल्ली पुलिस एवं प्रयास के महासचिव जसवीर सिंह मलिक तथा प्रयास की कार्यकारी निदेशक इंदु रानी सिंह शामिल हुईं।
एवार्ड के अध्यक्ष डॉ. विश्वेश्वर मिश्रा, महासचिव एवं पूर्व विधायक दुर्गा प्रसाद सिंह तथा दिल्ली सरकार के पूर्व सलाहकार एवं निदेशक निखिलेश झा ने अतिथियों का स्वागत किया। बैठक में कार्यालय सचिव प्रीतम कुमारी, सुनील कुमार सिंह, कमलेश झा, संजीव सेनगुप्ता, ठाकुर अजीत कुमार और सौरभ कुमार भी मौजूद रहे।
बैठक में प्रस्तावित कार्यक्रम के केंद्र में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की उस राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि को रखने का निर्णय लिया गया, जिसमें गांवों की भागीदारी और स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने को महत्वपूर्ण माना गया था। पंचायती राज व्यवस्था में लोकनायक के योगदान पर चर्चा के जरिए उनके विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता पर भी विमर्श की तैयारी है।
बैठक में एवार्ड और प्रयास के बीच भविष्य में व्यापक सहयोग को लेकर भी सहमति बनी। दोनों संस्थाओं ने समाज और राष्ट्र सेवा से जुड़े कार्यों में संयुक्त रूप से सहभागिता बढ़ाने और सामाजिक सरोकारों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

11 अक्टूबर का प्रस्तावित कार्यक्रम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब स्थानीय स्वशासन, पंचायतों की भूमिका और ग्रामीण विकास में जनभागीदारी को लेकर लगातार बहस होती रही है। ऐसे में लोकनायक के विचारों को वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में देखने का यह आयोजन विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।



