देश की पुलिस और सरकार न्याय नहीं दे सकती पुलिस सड़कछाप गुंडे के सामने हाथ बांधकर खड़ी रहती

देश की पुलिस और सरकार न्याय नहीं दे सकती पुलिस सड़कछाप गुंडे के सामने हाथ बांधकर खड़ी रहती

जे टी न्यूज, दिल्ली: देश के गृहमंत्री अमित शाह खुद को ’21वीं सदी का चाणक्य’ बताते हैं, लेकिन उनकी नाक के नीचे 14,000+ जवानों वाली दिल्ली पुलिस एक 24 साल के सड़कछाप गुंडे के सामने हाथ बांधकर खड़ी रहती है।

वही लड़का दिल्ली पुलिस का जूता और डंडा लेकर घूमता है और दावा करता है कि “पुलिस की कोई औकात नहीं जो हमें पकड़ ले”। जिस पुलिस को 3,650 वर्ग किमी के दिल्ली में आम नागरिकों की सुरक्षा करनी चाहिए, वह गृह मंत्रालय की राजनीतिक कठपुतली बन चुकी है।

आज भारत में लोकतंत्र केवल भाषणों और चुनावी विज्ञापनों में जीवित बचा है, धरातल पर तो 0% सुरक्षा और 100% अराजकता का नंगा नाच चल रहा है। जंतर-मंतर पर 16 साल की बच्ची निशु आजाद के सामने उसके पिता संजय कुमार पर सरेआम लोहे के कड़े से हमला किया जाता है, उनका सिर फोड़ दिया जाता है और लगभग 60 टांके आते हैं। लेकिन 60 दिन (2 महीने) तक कानून सोता रहा।

आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज (उम्र 24 वर्ष) पॉडकास्ट में खुलेआम शेखी बघारता है कि “मैंने 307 (हत्या का प्रयास) वाला काम किया, 60 टांके लगवाए, लेकिन मुझे रातभर में छोड़ दिया गया क्योंकि मेरे ऊपर कपिल मिश्रा, चिराग पासवान और नरेंद्र मोदी जी का हाथ है!”

यह केवल 1 आरोपी का दुस्साहस नहीं है, यह 100% सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडों की असलियत है।

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां या नेताओं के खिलाफ कोई 1 सोशल मीडिया पोस्ट लिख दे, तो 24 घंटे के अंदर 100 किलोमीटर दूर से 18 से 25 साल के युवाओं को गिरफ्तार कर देशद्रोह का मुकदमा ठोक दिया जाता है; लेकिन एक दलित/पिछड़े बाप का सिर फोड़ने वाले पर 60 दिनों तक नार्को टेस्ट तो दूर, मामूली एफआईआर (FIR No. 62/2026) में खानापूरी की जाती है।

न्यूज़18 जैसे मुख्यधारा के गोदी मीडिया चैनल आज नफ़रत के दलाल बन चुके हैं। 2023 की ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ में भारत 180 देशों में 161वें स्थान पर थूक दिया गया था, और आज की स्थिति में यह गिरावट 100% जायज लगती है।

एक 16 साल की बेटी चीख-चीख कर कह रही है कि “न्याय नहीं मिला तो ज़हर खा लूंगी”, लेकिन मीडिया उस पीड़िता को गलत साबित करने और स्वतंत्र भारद्वाज जैसे अपराधियों को “सनातनी योद्धा” बताकर महिमामंडित करने में जुटा है।

जब 2014 से पहले यूपीए शासन के दौरान निर्भया कांड हुआ था, तब यही मीडिया 24×7 चिल्लाता था; आज रामराज्य का ढोंग रचने वाली सरकार में हर 15 मिनट में 1 महिला पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन मीडिया केवल हिंदू-मुस्लिम की अफीम चाट रहा है।

​जो लोग 1975 के 21 महीने के आपातकाल को गाली देते हैं, उनसे सवाल है कि क्या 2026 में देश में “अघोषित आपातकाल” नहीं है?

​1950 में अनुच्छेद 14 और 21 पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में नागरिकों को समानता और जीवन का मौलिक अधिकार मिला।

​1989 का SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम राजीव गांधी सरकार ने 1989 में पारित किया ताकि वंचित समाज पर होने वाले अत्याचारों पर सख्त से सख्त गैर-जमानती कार्रवाई हो।

​2012 का POCSO एक्ट और 2013 का आपराधिक कानून संशोधन मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार में 2012 में पोक्सो और 2013 में बलात्कार/हिंसा के खिलाफ सख्त कानून बने, जिनमें 100% मौत की सजा तक का प्रावधान शामिल किया गया।

​1980-90 के दशक में जब चंबल के डाकुओं या मुंबई के गैंगस्टरों ने सिर उठाया, तो तत्कालीन सरकारों ने टाडा (TADA) और मकोका (MCOCA) जैसे कड़े कानूनों के तहत 100% कार्रवाई कर अपराधियों को नेस्तेनाबूद किया। लेकिन आज 2026 में, बीजेपी सरकार गुंडों पर मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें मालाएं पहनाती है और फंडिंग करती है।

2014 से पहले जिस हिंदुत्व को कभी कोई खतरा नहीं था, वह 2014 के बाद 100% पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बावजूद “खतरे में” कैसे आ गया? धर्म बचाने के नाम पर 20-22 साल के बेरोजगार युवाओं के हाथों में किताबों की जगह कड़े, डंडे और नफ़रत थमा दी गई है।

सोशल मीडिया पर 25-30 वीडियो बनाकर “मुसलमानों को काटने-मारने” की बातें करने वाले ये तथाकथित योद्धा न तो 1 गरीब बेटी की शादी का 100 रुपये का खर्चा उठाते हैं, न ही किसी छात्र की पढ़ाई का 1% योगदान देते हैं। यह रामराज्य नहीं, बल्कि 100% नफ़रती रावण राज्य है जहां राम के नाम पर चंदा चोरी से लेकर बेटियों के पिताओं पर कातिलाना हमले तक को “धर्म बचाना” कहा जा रहा है।

​राहुल गांधी, अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद ने इस पीड़ित परिवार के साथ खड़े होकर सराहनीय कार्य किया है। लेकिन देश की जनता अब केवल आश्वासनों से शांत नहीं बैठेगी।

​आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज और उसके साथियों पर तुरंत धारा 307 (हत्या का प्रयास) और SC/ST एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई कर नार्को टेस्ट करवाया जाए।
​गृहमंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस स्पष्ट करें कि किस नेता के इशारे पर 60 दिनों तक आरोपी को खुला घूमने दिया गया?

​पीड़िता निशु आजाद और उनके परिवार को तुरंत 24/7 पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए। ​अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।

यदि इस देश की पुलिस और सरकार न्याय नहीं दे सकती, तो जनता को समझ जाना चाहिए कि कानून का राज खत्म हो चुका है!

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