मिथिला विश्वविद्यालय में गांधी जयंती समारोह आयोजित, राजनीति विज्ञान विभाग में शीघ्र स्थापित होगा गांधी चेयर

मिथिला विश्वविद्यालय में गांधी जयंती समारोह आयोजित, राजनीति विज्ञान विभाग में शीघ्र स्थापित होगा गांधी चेयर

 

जे टी न्यूज, दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के तत्वावधान में महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर जुबिली हॉल में ‘गांधी जयंती समारोह’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने की। समारोह के दौरान कुलपति ने विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शीघ्र ही गांधी चेयर स्थापित किए जाने की घोषणा की।

समारोह के मुख्य अतिथि तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. पवन कुमार सिंह ने कहा कि माता जानकी की धरती मिथिला धन्य है, जहां महात्मा गांधी चार बार आए थे। गांधी जी का मिथिला के महाराजाओं के साथ व्यक्तिगत एवं घनिष्ठ संबंध था। उन्होंने कहा कि गांधी जितने सरल और सहज दिखाई देते हैं, उनके व्यक्तित्व का विश्लेषण उतना ही व्यापक और कठिन है।

प्रो. सिंह ने कहा कि गांधी ने विदेश में कानून की पढ़ाई के दौरान ही अपने वैचारिक विकास की दिशा पकड़ी और दक्षिण अफ्रीका में उनके प्रयोग शुरू हुए। इसके बाद उन्होंने जीवनभर निरंतर प्रयोग और आत्मालोचन के माध्यम से अपने विचारों को विकसित किया। प्रौढ़ावस्था में गांधी ने कहा था कि ‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है।’

उन्होंने गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को नमन करते हुए कहा कि गांधी की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। वे आधुनिकता के विरोधी नहीं थे, बल्कि मानव गरिमा और मनुष्यता के पक्षधर थे। वे समय के अत्यंत पाबंद व्यक्ति थे तथा सत्य और अहिंसा के प्रबल समर्थक थे।

गांधी चेयर की स्थापना की घोषणा

 

कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने अध्यक्षीय संबोधन में राजनीति विज्ञान विभाग में शीघ्र गांधी चेयर की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गांधी के व्यक्तित्व और विचारों की चर्चा एक-दो घंटे में संभव नहीं है। युवावस्था में गांधी सूट-बूट और टाई पहनते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने जीवन और व्यक्तित्व में व्यापक बदलाव किया।

कुलपति ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए व्यक्ति को स्वयं को दर्पण बनाकर देखना पड़ता है। गांधी के विचार पहले भी प्रासंगिक थे, आज भी हैं और भविष्य में भी रहेंगे। उन्होंने गांधी को राष्ट्र का ध्रुवतारा बताते हुए कहा कि मानवता और इंसानियत से जुड़े उनके विचारों को दबाया नहीं जा सकता। यदि हम गांधी के किसी एक विचार को भी अपने जीवन में पूरी तरह उतार सकें तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।

कुलपति ने गांधी को अपना प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 के निर्माण के लिए गांधी के विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

गांधी 21वीं सदी के लिए भी प्रासंगिक : प्रो. मुनेश्वर यादव

विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि गांधी 21वीं सदी के लिए भी प्रासंगिक हैं और पूरी मानवता के लिए उनके विचार महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि गांधी ने अपने जीवनकाल में अफ्रीका, यूरोप और एशिया के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित किया और आज भी उनके विचार दुनिया को रास्ता दिखा रहे हैं।

उन्होंने गांधी के विचारों में कर्तव्य और अधिकार के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि गांधी के अनुसार कर्तव्य के हिमालय से ही अधिकार की गंगा निकलती है।

गांधी सदन में किया गया पुष्पांजलि कार्यक्रम

संगोष्ठी से पूर्व कुलपति के नेतृत्व में अतिथियों, शिक्षकों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवकों ने महात्मा गांधी सदन पहुंचकर गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। बीएड के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया। छात्र-छात्राओं ने गांधी जी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान गांधी के जीवन पर आधारित मूक अभिनय भी प्रस्तुत किया गया।

निबंध प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित

गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित तत्काल निबंध प्रतियोगिता में तनुश्री ने प्रथम, श्वेता कुमारी ने द्वितीय तथा रघुनंदन कुमार एवं सौम्य सुगंध ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। गुड्डू कुमार, निधि कुमारी, शांभवी कुमारी, गौरव कुमार, महाचंद्र ठाकुर, साक्षी कुमारी और शिवानी कुमारी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। सभी सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

भाषण प्रतियोगिता में शामिल सभी छात्राओं तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के 50 से अधिक स्वयंसेवकों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, स्मृति चिह्न और तुलसी पौधा भेंट कर किया गया।

 

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. हरे कृष्ण सिंह ने स्वागत किया, जबकि उपनिदेशक डॉ. विवेक कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। बीएड नियमित के संगीत शिक्षक अक्षय शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। समारोह का समापन बिहार गीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

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