नम आँखों से अदा होगी अलविदा जुमे की नमाज़।

दरभंगा: इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना रमजान की आज 24 तारीख है अर्थात एक पांच-छः रोज़े के बाद ईद का त्यौहार मनाया जाएगा।
इस माह को इबादतों के लिए खास माना गया है। मुस्लिम समुदाय के लोग इस माह में तीस दिन रोज़े रखते हैं, पांच वक्त की नमाज़ के अलावा रात्रि में विशेष रूप से तरावीह की नमाज़ अदा की जाती है। शाम को सामूहिक रूप से इफ्तार करने व कराने का अलग ही आनंद है। इस माह के आखरी दस दिनों तक मस्जिद में गुजारकर एकांतवाश में एकाग्रता के साथ इबादत का भी अलग महत्व है जिसे ऐतकाफ कहते हैं। इस माह लोग जकात व फितरा की राशि से गरीब ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं।
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में एक एक इबादत के बदले सत्तर गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।
इसलिए इस माह को रहमत व बरकत वाला महीना भी कहा जाता है।
ऐसे में जब इस महीने की विदाई का समय आता है तो मुस्लिम समुदाय की ऑंखें नम होने लगती है। जबकि इस माह के खत्म होते ही ईद की खुशियां प्रतीक्षा में होती है फिर भी अधिकतर लोगों को इस माह के जाने का गम होता है।
अलविदा जुमा रमजान माह में पड़ने वाले चार पांच जुमा में आखरी जुमा होता है। इस जुमा के गुज़र जाने से ग्यारह माह बाद ही फिर रमजान का जुमा मिलता है इसलिए इस जुमा को खास महत्व दिया जाता है।
मुसलमानों के लिए तो जुमे का दिन साप्ताहिक ईद की तरह होता है लेकिन ईद से ठीक पहले अदा किया जाने वाला अलविदा जुमा को ईद से पहले ईद की तरह ही माना जाता है।
सामाजिक कार्यकता, सूफी विचारक व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत भीखा शाह सैलानी के खादिम शाह मोहम्मद शमीम के मुताबिक वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर से बढ़ते नुकसान के बाद बिहार में लागू लॉकडाउन के कारण सभी धार्मिक स्थलों में आम लोगों के प्रवेश पर पाबन्दी से इस वर्ष भी दरभंगा के मुस्लिम समुदाय को अलविदा जुमा व ईद की नमाज़ घर से ही अदा करनी होगी।
श्री शमीम ने एक अपील जारी कर मुस्लिम समुदाय से कहा है कि सरकार के आदेशों का पालन करते हुए इस साल भी अलविदा-जुमा व ईद की नमाज़ घरों में रह कर ही अदा करें। मस्जिदों व ईदगाहों में आम लोगों के लिए सख्त पाबन्दी है।
लोगों से यह भी कहा है कि ज़्यादा से ज़्यादा गरीबों व बेसहारों की मदद करें। शासन-प्रशासन के आदेशों का प्लान व सहयोग करें।
जन प्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी अपील किया है कि समाज में जागरूकता का प्रयास करें कि ईद पर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, हाथ न मिलाएं व गले न मिलें, कॉल कर के व मैसेज से एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद व शुभकामनाएं दें।
Edited By :- savita maurya 


