18 वीं लोक सभा चुनाव पर किसान आंदोलन का व्यापक असर
18 वीं लोक सभा चुनाव पर किसान आंदोलन का व्यापक असर

जे टी न्यूज, बेतिया: देश की 18 वी लोकसभा चुनाव संपन्न हो गया ।पूरे देश में जो नतीजे सामने आए हैं। वह यह बतला रहा है कि नरेंद्र मोदी की तानाशाही, कार्पोरेट परस्ती तथा किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ देश के किसानों ने भारी मतदान किया है ।नरेंद्र मोदी हटाओ किसान और किसानी बचाओ के नारे को किसानों ने सफली भूत बनाया है। जिसका स्पष्ट झलक पंजाब, हरियाणा ,राजस्थान, उत्तर प्रदेश ,बिहार के पश्चिमी हिस्से के चुनाव परिणाम से मिलता है।इस लोक सभा चुनाव में किसानों ने अपने लोकप्रिय किसान नेता अखिल भारतीय किसान सभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा वर्तमान उपाध्यक्ष का. आमरा राम को राजस्थान के सीकर से, तमिलनाडु किसान सभा के राज्य नेता का. सचिदानंद को तमिलनाडु के डिंडीगुल
से ,का. राजाराम सिंह,महासचिव अखिल भारतीय किसान महासभा को बिहार के काराकाट से, का. सुदामा प्रसाद नेता किसान महासभा को बिहार के आरा लोक सभा क्षेत्र सहित किसान आंदोलन से जुड़े अनेक किसान नेताओं को विजय दिला कर, किसानों का आवाज बना कर लोक सभा में भेजा है । किसानों ने चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार चलाया। गांव गांव में संयुक्त किसान मोर्चा सहित अपने-अपने किसान संगठनों के फैसलों को किसानों के बीच बतलाया और साफ-साफ शब्दों में किसान कार्यकर्ताओं ने किसानो से कहा कि जब तक किसान और खेती विरोधी नरेंद्र मोदी की सरकार को देश से उखाड़ कर नहीं फेंकेंगे। तब तक किसानों की जमीन खतरे में रहेगी और किसान परेशान नजर आएंगे ।इस तरह लोकसभा चुनाव में देश के खेत मजदूरों की भी भूमिका सराहनीय रही। किसानों के साथ-साथ खेत मजदूर की जुगलबंदी सभी राज्यों में देखने को मिला ।खेत मजदूर ने भी इस बात को समझा कि जब मनरेगा को पूर्व से मिल रहे बजट का 33% हिस्से में कटौती मोदी सरकार कर लेती है और फिर से मजदूरों के लिए कोई भी योजना नहीं बनाती है। तो ऐसी किसान, खेत मजदूर ,तथा मजदूर विरोधी सरकार को देश में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है ।ठीक इसी तरीके से शहरों के अंदर ट्रेड यूनियन मजदूर भी गोलबंद होते गए और मोदी हराओ,भाजपा भगाओ,
रोजगार बचाओ ,मजदूर बचाओ के नारे के साथ ट्रेड यूनियन मजदूरों ने भी अपनी मुहिम चलाई ।

लबो लुवाब यह सामने आया कि 2019 में 303 सीटों पर विजय पाने वाली भारतीय जनता पार्टी को इस बार मात्र 240 सीटें प्राप्त हुई। किसान आंदोलन का हीं प्रभाव था की पंजाब ,हरियाणा ,राजस्थान ,उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की भारी पराजय हुई ।क्योंकि दिल्ली के सिंधु बॉर्डर , टिकरी बॉर्डर ,पलवल बॉर्डर ,गाजीपुर बॉर्डर पर 13 महीने तक चलने वाली ऐतिहासिक किसान आंदोलन, जिसमें पंजाब ,हरियाणा उत्तर प्रदेश ,राजस्थान के किसानों की सबसे भारी भागीदारी रही ।इस आंदोलन में 750 किसान शहीद हो गए ।किसानों पर हमले बढ़े ।लेकिन दिल्ली जाने वाली सभी सड़कों पर बड़े-बड़े नुकीले छड़ों को गाड़ दिया गया ।बुलडोजर से सड़कों को तोड़ दिया गया और मानो देश की सीमा पर आक्रमण करने वाले भारत विरोधी किसी देश से युद्ध करने के लिए हजारों की तादाद में सी आर पी को उतार दिया गया हो। देश के किसान जो पूरे देश को अपनी मेहनत से खेती करके देश की जनता को भोजन देता है ।वह किसान कर्ज की बोझ से दवा हुआ है। मोदी सरकार के 10 साल की शासन अवधि में सवा लाख किसान आत्महत्या कर लिया । एम एस पी को कानूनी दर्जा नहीं दिया गया ।स्वामीनाथन कमीशन के अनुशंसाओं को लागू नहीं किया गया ।किसानों को कर्ज से मुक्ति नहीं दी जा रही। 750 किसान जो आंदोलन के दौरान शहीद हो गए। उनके आश्रितों को मुआवजा नहीं दिया गया।लखीमपुर खीरी के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इशारे पर उसका उदंड बेटा आशीष मिश्रा टेनी अपनी जीप से रौंद कर पांच किसानो की हत्या कर दी ।उसको मंत्रिमंडल से हटाने तथा गिरफ्तार करने का काम मोदी सरकार द्वारा नहीं किया गया। यह मोदी सरकार के किसान विरोधी चंद उदाहरण है।

लेकिन लखीमपुर खीरी के किसानों का हत्यारा, लखीमपुर खीरी के सांसद अजय मिश्रा टेनी तथा महिला पहलवानों से छेड़खानी करने वाले भाजपा के कुख्यात अपराधी तथा रंगदार नेता बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र को कैसरगंज से भाजपा ने उम्मीदवार बनाया । उसको भी इस लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से किसानों ने शिकस्त देकर यह बतला दिया कि किसान मजबूर नहीं हैं। जो ठान लेते हैं,उसे करके दिखाना भी जानते हैं।
अबकी बार नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की बैसाखी पर खड़ी नरेंद्र मोदी की सरकार के तेवर को किसानों ने बवना बना दिया है । मोदी की तानाशाही को लगाम लगा दिया है ।अगर आने वाले दिनों में नरेंद्र मोदी की किसान विरोधी, संविधान विरोधी ,नौजवान विरोधी ,मजदूर विरोधी कोई निर्णय देश के सामने आता है ।तो इसका एक अदद जिम्मेदार जनता दल यू के नीतीश कुमार तथा तेलुगु देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू होंगे और आने वाले दिनों में दोनों पर किसानों के हमले बढ़ेंगे। उन्हें भी गद्दी से उतारने का काम देश की निर्णायक शक्ति ,राष्ट्रीयता से ओतोप्रोत,बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर द्वारा निर्मित भारत की संविधान के रक्षक देश के किसान हीं करेंगे।


