बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: हाजी डॉ. शकील सैफी का ‘हम’ को खुला समर्थन

बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका: हाजी डॉ. शकील सैफी का ‘हम’ को खुला समर्थन जे टी न्यूज, मुंबई :
बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करने वाला घटनाक्रम शुक्रवार को मुंबई में देखने को मिला। वर्ल्ड पीस हार्मनी के चेयरमैन और सैफी हॉस्पिटल्स के सीईओ, एनडीए के लोकप्रिय चेहरे हाजी डॉ. शकील सैफी ने भारत सरकार के MSME मंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से मुलाकात कर न केवल फूलों का गुलदस्ता भेंट किया, बल्कि भावी विधानसभा चुनाव के लिए खुला समर्थन भी दे डाला।

यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी – यह था सियासी शंखनाद।

सैफी बोले – “हम के हर उम्मीदवार के लिए खुद मैदान में उतरूंगा”

डॉ. शकील सैफी ने साफ कहा कि वे हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के सभी प्रत्याशियों के लिए आगामी चुनाव में प्रचार अभियान की कमान खुद संभालेंगे। इससे स्पष्ट हो गया कि एनडीए खेमे में ‘हम’ पार्टी को अब सभी मामले एक ताकतवर, स्टार प्रचारक और कुशल रणनीतिकार मिल गया है।

बात सिर्फ राजनीति की नहीं, अब विकास भी एजेंडे पर

मुलाकात के दौरान MSME मंत्रालय की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने, बिहार में हेल्थ-टेक, मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग और युवा उद्यमियों को बढ़ावा देने पर लंबी बातचीत हुई।
डॉ. सैफी ने बिहार में “MSME हेल्थ जोन” और “मेडिकल स्टार्टअप हब” जैसे विजन प्रोजेक्ट्स का खाका भी प्रस्तुत किया, जिसे मंत्री मांझी ने बेहद सकारात्मक रूप से लिया।

मांझी-सैफी की जोड़ी: बिहार की राजनीति में नया समीकरण

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मांझी के अनुभव और सैफी के प्रभावशाली जनाधार का मेल बिहार चुनाव में कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
डॉ. सैफी अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं हैं – वे बिहार की सियासत के नए किंगमेकर के तौर पर देखे जा रहे हैं।हम का परिवारिक नेतृत्व, एनडीए में मजबूत पकड़:-ज्ञात हो कि ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं जीतनराम मांझी के पुत्र श्री संतोष कुमार सुमन हैं, जो बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। मांझी का अनुभव और सुमन की युवा सोच पहले से ही पार्टी को एक नया तेवर दे रही है – अब डॉ. सैफी के साथ जुड़ने से इसमें ‘तेज धार’ भी जुड़ गई है।

राजनीति का नया सूत्र: धर्मनिरपेक्ष सोच + एनडीए नीति + विकास का विजन = बिहार की नई कहानी

हाजी डॉ. शकील सैफी के इस समर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार का आगामी चुनाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि चेहरे और विश्वास का भी होगा – और उस भरोसे के केंद्र में अब एक नाम तेजी से उभर रहा है – हाजी डॉ. शकील सैफी।

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