छत्तीसगढ़ में कैथोलिक ननों की अवैध गिरफ्तारी और उत्पीड़न की अखिल भारतीय किसान सभा ने की निंदा

राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की आरएसएस साज़िश का लगाया आरोप

अल्पसंख्यकों पर हमले के दोषियों और असंवैधानिक पुलिस-प्रशासन पर कार्रवाई तथा झूठे मुकदमे को तुरंत रद्द करने की मांग

 

जे टी न्यूज़ नई दिल्ली : अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दो कैथोलिक ननों – प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस – की अवैध गिरफ्तारी और बदले की भावना से किए जा रहे उत्पीड़न की कड़ी निंदा करती है। ये दोनों नन, जो मूलतः केरल की रहने वाली हैं, को 25 जुलाई को सुख़मन मंडावी के साथ कथित जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी बजरंग दल के एक स्थानीय कार्यकर्ता की शिकायत के आधार पर की गई थी। संघ परिवार से जुड़े संगठनों ने यह अफवाह फैलाई कि इन ननों ने नारायणपुर की तीन महिलाओं का धर्मांतरण कराया है। एक वायरल वीडियो में एक बजरंग दल कार्यकर्ता ननों और अन्य लोगों को धमकाते हुए देखा गया।

 

धर्मांतरण की कथित पीड़ित महिलाओं में से एक ने बयान दिया है कि बजरंग दल के कार्यकर्ता उन्हें पुलिस के समक्ष झूठा बयान देने के लिए डरा-धमका रहे थे।

यह घटना भाजपा शासित राज्यों में ईसाई अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है और पूरे देश में राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने की आरएसएस की साज़िश को उजागर करती है। AIKS का मानना है कि हिंदुत्व के नाम पर अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने वाली ये असंवैधानिक गतिविधियाँ संविधान की मूल भावना के खिलाफ हैं और इन्हें कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए।

AIKS मांग करती है कि निर्दोष ननों पर दर्ज प्राथमिकी को तुरंत रद्द किया जाए और ईसाई अल्पसंख्यकों पर हमला करने वाले सभी सांप्रदायिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन असभ्य और निरंकुश पुलिस और राजस्व अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का उल्लंघन करते हुए सांप्रदायिक हमलावरों का साथ दिया और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को नुकसान पहुँचाया।

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