समस्तीपुर रेल मंडल में आपातकालीन कोटे पर उठे सवाल, कोटा आवंटन में पारदर्शिता की मांग

समस्तीपुर रेल मंडल में आपातकालीन कोटे पर उठे सवाल, कोटा आवंटन में पारदर्शिता की मांग

समस्तीपुर। पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर रेल मंडल में आपातकालीन आरक्षण (इमरजेंसी कोटा) को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शंभु राय ने आरोप लगाया है कि जरूरतमंद यात्रियों को आपातकालीन कोटे का लाभ मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कोटा आवंटन की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता का अभाव है।

शंभु राय ने कहा कि समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत कई लोकसभा और राज्यसभा सांसदों का क्षेत्र आता है, लेकिन इसके बावजूद मंडल से संचालित ट्रेनों में आपातकालीन कोटे की संख्या सीमित है। उनका आरोप है कि वास्तविक जरूरतमंद यात्रियों को कोटा उपलब्ध कराने में अधिकारियों को कई प्रकार के दबावों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने दावा किया कि सांसदों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न प्रभावशाली व्यक्तियों की अनुशंसाओं के आधार पर बड़ी संख्या में आपातकालीन कोटे की मांग आती है, जिसके कारण सामान्य जरूरतमंद यात्रियों को परेशानी होती है। शंभु राय ने आरोप लगाया कि आपातकालीन कोटा आवंटन की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया जाता, जिससे कई तरह की आशंकाएं पैदा होती हैं।

उन्होंने मंडल प्रशासन से मांग की कि पिछले एक वर्ष के दौरान जारी किए गए सभी आपातकालीन कोटों का विवरण सार्वजनिक किया जाए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि किस ट्रेन में कितने कोटे आवंटित किए गए और किन-किन अनुशंसाओं के आधार पर आरक्षण स्वीकृत किया गया।

शंभु राय का कहना है कि रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। यदि कोटा आवंटन की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाती है, तो इससे आम यात्रियों का विश्वास बढ़ेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात की आशंकाओं पर भी विराम लगेगा।

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