लनामिवि के एनएसएस कोषांग द्वारा आयोजित सात दिवसीय आवासीय ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन’ शिविर जारी
प्रशिक्षण से तैयार 'युवा आपदा मित्र' आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिथिला के लिए सिद्ध होंगे मील का पत्थर- डॉ चौरसिया
लनामिवि के एनएसएस कोषांग द्वारा आयोजित सात दिवसीय आवासीय ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन’ शिविर जारी
प्रशिक्षण से तैयार ‘युवा आपदा मित्र’ आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिथिला के लिए सिद्ध होंगे मील का पत्थर- डॉ चौरसिया

जे टी न्यूज, दरभंगा: बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग द्वारा जुबिली हॉल में आयोजित “आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन” विषय पर सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन एनएसएस लक्ष्य गीत- “उठें समाज के लिए उठें उठें…… के उपरांत शिविर का शुभारंभ करते हुए एनएसएस समन्वयक-प्रथम डॉ आर एन चौरसिया ने आपदा प्रबंधन के महत्त्वों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रशिक्षण से तैयार 800 ”युवा आपदा मित्र” आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मिथिला के लिए मील का पत्थर सिद्ध होंगे। कहा कि मिथिला एवं बिहार आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील है। ऐसी स्थिति में केवल सरकारी तंत्र पर निर्भर रहना उचित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक, विशेष कर युवा छात्र-छात्राओं को आपदा प्रशिक्षित एवं जागरूक होना अत्यावश्यक है। शिविर में कार्यक्रम समन्वयक-02 डॉ शबनम कुमारी, डॉ सोनू राम शंकर, डॉ सुधांशु कुमार, डॉ अरविन्द कुमार मिलन, डॉ मुंडेश्वर साह, डॉ उदय कुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ रीता कुमारी, डॉ अनुपम प्रिया, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ लक्ष्मी कुमारी, डॉ रश्मि दत्ता, डॉ दिलीप कुमार झा, मनीष राज, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अमित कुमार झा, रवीन्द्र कुमार सिंह आदि काफी सक्रिय रहे।

तकनीकी सत्र में एसडीआरएफ टीम में शामिल कृष्णनंदन सिंह, रूपेश कुमार पासवान, मालिक कुमार, राजू कुमार, देव कुमार, तनुजा कुमारी एवं संतोषी कुमारी आदि ने तीन तकनीकी सत्रों में विस्तार से डूबने वाले व्यक्ति को बचाने के विभिन्न स्थानीय एवं वैज्ञानिक उपायों की विस्तृत जानकारी देते हुए उनके पेट से पानी निकालना, सांस रुकने पर जरूरत के अनुसार सीपीआर देने, बाढ़ के समय उचित भोजन एवं पानी की व्यवस्था एवं सावधानियों आदि की जानकारी दी। वहीं मालिक कुमार ने भूकंप आने के कारण एवं बचने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी देते हुए कहा कि भूकंप का दौरा प्रायः 1 मिनट से भी काफी कम होता है, जिस दौरान ही हमें बचाने के भी उपाय करने होते हैं। रूपेश कुमार पासवान ने आग लगने के कारण, बुझाने के विभिन्न तरीके एवं आग से जल जाने पर प्राथमिक उपचार के बारे में विस्तार से बताया।

बौद्धिक सत्र में पीजी एनएसएस इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सोनू राम शंकर ने “आपदा में आध्यात्मिक रूपांतरण” विषय पर विशेष व्याख्यान देते हेतु कहा कि आपदा काल में भी निष्काम भाव से समाजसेवा करने से आत्मबल एवं आत्मविश्वास मिलता है। कहा कि सरकार की उपायें तब तक पूरी तरह कामयाब नहीं हो सकती, जब तक आम लोगों का सहयोग न मिले। उन्होंने तीन तरह के मुख्य दुःखों- आधिदैविक, अधिभौतिक एवं आध्यात्मिक पर सोदाहरण विस्तार से प्रकाश डाला।



