पटना विश्वविद्यालय में छात्रों की दस सूत्री मांगों को लेकर एआईएसएफ का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

पटनाविश्वविद्यालय में छात्रों की दस सूत्री मांगों को लेकर एआईएसएफ का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी

जे टी न्यूज, पटना: पटना विश्वविद्यालय में छात्रों की दस सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज तीसरे दिन भी जारी रहा। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की टीम ने उनकी मेडिकल जांच की। आज एआईएसएफ ने विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच पहुंचकर इस भूख हड़ताल का समर्थन मांगा, जिससे तमाम छात्रों ने एक स्वर में इस भूख हड़ताल को अपना समर्थन दिया। भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचकर कई छात्रों ने भूख हड़ताल पर बैठे साथियों का हौसला बढ़ाया।

इस अवसर पर एआईएसएफ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड रवीन्द्रनाथ राय ने छात्रों को समर्थन देते हुए कहा कि पटना विश्वविद्यालय के कुलपति छात्रों और विश्वविद्यालय के साथ तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र अपने संघर्ष के माध्यम से कुलपति को झुकने के लिए मजबूर करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय की एडमिशन नियमावली में प्रस्तावित बदलाव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय के छात्र ही शिक्षा से दूर हो जाएंगे।

भूख हड़ताल को समर्थन देने पहुंचे एआईएसएफ बिहार राज्य के पूर्व सचिव जितेन्द्र कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को बंद कर निजी हाथों में सौंपने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही फीस वृद्धि के कारण गरीब तबके से आने वाले छात्र बढ़ी हुई फीस का भुगतान नहीं कर पाएंगे और शिक्षा से दूर हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति छात्रों और कर्मचारियों से संवाद नहीं कर रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय की समस्याएं और गंभीर हो रही हैं।

पटना विश्वविद्यालय एआईएसएफ के पूर्व नेता निखिल झा ने कहा कि विश्वविद्यालय की गिरती शिक्षा व्यवस्था, अधिकारियों और छात्रों के बीच संवाद की कमी तथा छात्रों को विभिन्न सुविधाओं से वंचित रखने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि जिस विश्वविद्यालय की अपनी शानदार भूमिका और गौरवशाली परंपरा रही है, उसकी छवि वर्तमान कुलपति के रवैये से धूमिल हो रही है।

इस दौरान एटक बिहार राज्य के महासचिव अजय जी ने भी भूख हड़ताल को अपना समर्थन दिया और कहा, “जब मैं इस विश्वविद्यालय का छात्र हुआ करता था, तब इस विश्वविद्यालय में कई कुलपतियों के साथ हमारी लड़ाई रहती थी, मगर उस समय के कुलपति आंदोलनकारी छात्रों से मिलते थे। अभी के इस कुलपति ने तो तानाशाही की सारी सीमाओं को पार कर दिया है। मैं छात्रों की इस भूख हड़ताल को समर्थन देता हूं।”

इस अवसर पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रभात कुमार पांडेय ने भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा कि आज जिस तरह देश में छात्रों और युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है तथा पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, उसी तरह पटना विश्वविद्यालय के कुलपति भी तानाशाही के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य के नेता इरफान अहमद फातमी ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय देश के सातवें सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है और इसकी अपनी गौरवशाली परंपरा रही है। लेकिन वर्तमान कुलपति के रवैये के कारण विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि एलएलबी प्रवेश परीक्षा रद्द नहीं की गई और पीजी में हुई व्यापक फीस वृद्धि को अविलंब वापस नहीं लिया गया, तो एआईएसएफ विश्वविद्यालय में आंदोलन को और व्यापक करेगा।
इसी को समर्थन देने आयीं बिहार राज्य महिला समाज की नेत्री राजश्री किरण ने कहा कि कहा कि मैं महिला समाज की तरफ से समर्थन करती हूँ

एआईएसएफ की प्रमुख मांगें

1. एलएलबी प्रवेश परीक्षा में हुई प्रश्नपत्र लीक की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित की जाए।

2. पीजी में हुई व्यापक फीस वृद्धि को अविलंब वापस लिया जाए।

3. पटना विश्वविद्यालय के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में MFA की पढ़ाई अविलंब शुरू की जाए।

4. पटना विश्वविद्यालय के पीजी नामांकन में पुराना कोटा बहाल किया जाए।

5. पटना विश्वविद्यालय सेंट्रल लाइब्रेरी को 24×7 शुरू किया जाए।

6. विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

7. विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लिए भयमुक्त एवं लोकतांत्रिक वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

8. छात्रों से जुड़ी अन्य सभी शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक मांगों का अविलंब समाधान किया जाए।

एआईएसएफ ने कहा है कि छात्रों की मांगों का समाधान होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी।

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