लुप्त होती मौलिक संस्कृति के संरक्षण में विद्यार्थियों की रचनात्मक पहल
दक्षिण सुगौली के श्री ने.रा.मा.वि. में छठ पर्व पर आधारित नाटक प्रस्तुत - संजय दास थारू
लुप्त होती मौलिक संस्कृति के संरक्षण में विद्यार्थियों की रचनात्मक पहल
दक्षिण सुगौली के श्री ने.रा.मा.वि. में छठ पर्व पर आधारित नाटक प्रस्तुत – संजय दास थारू
जे टी न्यूज , रक्सौल /बीरगंज /नेपाल : पर्सा जिले के पटेर्वा सुगौली गाउँपालिका-4, दक्षिण सुगौली स्थित श्री नेपाल राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय (श्री ने.रा.मा.वि.) के विद्यार्थियों ने लुप्त होती जा रही अपनी मौलिक संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाजों को बचाने के उद्देश्य से छठ पर्व पर आधारित एक सुंदर नाटक प्रस्तुत किया।
विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से छठ पर्व के धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को जीवंत रूप में दिखाया। उन्होंने छठ पर्व मनाने की पारंपरिक विधि, पूजा-पद्धति, व्रतियों की आस्था, सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा तथा छठी मैया की उपासना को अपने अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।
विशेष रूप से तराई-मधेश की पहचान से जुड़े छठ पर्व की महत्ता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से विद्यार्थियों ने यह नाटक तैयार किया था। नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि छठ पर्व केवल पूजा-पाठ का त्योहार नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक एकता, सामाजिक सद्भाव, आपसी प्रेम और भाईचारे को भी मजबूत बनाता है।
आज के समय में आधुनिकता, तकनीक के बढ़ते उपयोग और बदलती जीवनशैली के कारण नई पीढ़ी में अपनी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों के प्रति जानकारी तथा रुचि कम होती जा रही है। ऐसे समय में विद्यालय के विद्यार्थियों की यह पहल संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
पढ़ाई के साथ-साथ इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपने समाज, संस्कृति, भाषा, परंपरा और पहचान को समझने का अवसर मिलता है। नाटक जैसी प्रस्तुतियों से बच्चों में अभिनय क्षमता, रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास और मिल-जुलकर काम करने की भावना भी विकसित होती है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने और पुरानी परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में विद्यालयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दक्षिण सुगौली के इस विद्यालय के विद्यार्थियों की पहल ने यह साबित किया है कि शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति और संस्कारों का ज्ञान देना भी जरूरी है।

संस्कृति हमारी पहचान है और इसे बचाकर रखना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
