कहलगांव विस में कांग्रेस और भाजपा में टक्कर, अब तक हुए 19 चुनावों में कांग्रेस को यहां से 13 बार मिली है जीत

 

जेटीन्यूज़

 

गौतम सुमन गर्जना

 

*कहलगांव,भागलपुर* : बिहार में कांग्रेस की मजबूत सीटों में से एक कहलगांव विधानसभा सीट पर चुनाव बहुत ही रोचक होने वाला है। यहां से कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह नौवीं बार विधायक हैं। इस बार कांग्रेस विधायक सदानंद सिंह की राह रोकने के लिए एनडीए निर्णायक लड़ाई की तैयारी में है। इस बार सदानंद सिंह ने अपनी जगह अपने बेटे को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में लोजपा यहां दूसरे नम्बर पर रही थी। वहीं एनडीए ने पवन यादव को मैदान में उतारा है। विगत चुनाव में भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद पवन यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। जिसमें उन्हें 25,000 से अधिक मत मिले थे। वहीं एनसीपी से भागलपुर जदयू सांसद अजय मंडल के भाई अनुज कुमार मंडल ने अपना नामांकन कराया है। कहलगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता सदानंद सिंह की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है ।ऐसे में सदानंद सिंह अपने बेटे को राजनीतिक रूप से स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसको लेकर रणनीति तैयार कर ली गई है। राजग की ओर से भाजपा प्रत्याशी पवन यादव भी मंझे हुए राजनेता की तरह लोगों से जनसंपर्क कर रहे हैं। लेकिन अनुज कुमार मंडल ने मैदान में आ जाने से राजग का समीकरण बिगड़ता दिखाई दे रहा है। वैसे कहलगांव विधानसभा क्षेत्र कुशवाहा, यादव और गंगोता बहुल है। कुशवाहा हमेशा से सदानंद सिंह को वोट करते रहे हैं। लेकिन राजद सहित विभिन्न दलों से गठबंधन होने के कारण शुभानंद मुकेश यादव के वोट में सेंध लगाने में कामयाब होते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा मुस्लिम और वाम मोर्चा के कैडर शुभानंद मुकेश को समर्थन देते दिखाई दे रहे हैं। रही- सही कसर एनसीपी के अनुज कुमार मंडल पूरी करते दिखाई पड़ रहे हैं।गंगोता का जो भी वोट अनुज मंडल के पक्ष में जाएगा वह सीधे तौर पर भाजपा उम्मीदवार पवन यादव को नुकसान पहुंचाता दिख रहा है। ऐसे में इस सीट पर पवन यादव की राह मुश्किल होती दिखाई दे रही है। वर्ष 2010 में यहां जदयू से कहकशां परवीन चुनाव लड़ी थीं और दूसरे नम्बर पर रही थीं। इस सीट से वर्तमान में कांग्रेस के कद्दावर नेता सदानंद सिंह विधायक हैं। कांग्रेस महागठबंधन में है। शुभानंद कांग्रेसियों और अपने युवा समर्थकों के साथ विधानसभा क्षेत्र में ताबड़तोड़ जनसंपर्क करते नजर आ रहे हैं। 1951 में यहां से रामजन्म महतो पहले विधायक बने जो कांग्रेस से थे। 1957 और 1962 के चुनाव में सैयद मकबूल अहमद जीते, जो श्रीकृष्ण सिंह मंत्रिमंडल के प्रमुख मंत्रियों में थे। मगर 1967 में उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी के नागेश्वर सिंह ने हरा दिया। अब तक हुए 19 चुनावों में कांग्रेस यहां से 13 बार जीत चुकी है। एक बार कम्युनिस्ट, दो बार जनता दल और एक बार जदयू उम्मीदवार जीते हैं।सदानंद सिंह वर्ष 1969 में कम्युनिस्ट के नागेश्वर सिंह को हराकर कांग्रेस से विधायक बने थे। 1985 में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया उसबार वे निर्दलीय लड़े और चुनाव जीत गए। सदानंद को 1990 और 1995 के चुनाव में जनता दल के महेश मंडल और 2005 में जदयू के अजय मंडल से शिकस्त मिली।यह क्षेत्र एनटीपीसी और विक्रमशिला ऐतिहासिक स्थल के लिए भी जाना जाता है। यहां प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की है। यहां गंगा तट पर बटेश्वर स्थान है, जिसे गुप्त काशी कहा जाता है। कई देशों के सैलानी इन ऐतिहासिक स्थलों पर घुमने आते हैं। लंगड़ा आम, हरी मिर्च की खेती इस इलाके की खास पहचान है। दोनों बांग्लादेश तक जाते हैं। कहलगांव विधानसभा मेंकु ल तीन प्रखंड, 43 पंचायत हैं। यहां कुल मतदाताओं ‌की संख्या 303349। जिसमें पुरुष मतदाता 143310 और महिला मतदाता 160031 हैं।

Website Editor :- Neha Kumari

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