का. कपिलदेव प्रसाद के नेतृत्व में रिक्शा मजदूर सभा के बढ़ते कदम 23 जून का. कपिलदेव की 15 वीं पुण्यतिथि पर विशेष
का. कपिलदेव प्रसाद के नेतृत्व में रिक्शा मजदूर सभा के बढ़ते कदम
23 जून का. कपिलदेव की 15 वीं पुण्यतिथि पर विशेष
आलेख – प्रभुराज नारायण राव
जे टी न्यूज

रिक्शा मजदूर सभा बेतिया की स्थापना 1967 में का. कपिलदेव प्रसाद तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के चंपारण के नेतृत्वकारी साथी का. सत्येंद्र नारायण मित्र के दिशा निर्देशन में हुआ । उस समय मजदूरों का कोई संगठन नहीं होता था । खासकर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को संगठन में परिवर्तित करने का यह प्रथम प्रयास था । रिक्शा मजदूर सभा बेतिया का कार्यालय मीना बाजार के ठीक सामने पुराना बस स्टैंड के जमीन में बनाई गई । उस समय एक झोपड़ी के शक्ल में कार्यालय चल रही थी ।धीरे-धीरे विकास की गति तेज होती गई । संगठन के अंदर मजदूरों की उपस्थिति बढ़ती गई और उनके समस्याओं के विरुद्ध आंदोलन भी तेज होते गए । इसी के साथ साथ रिक्शा मजदूरों के बेहतरी के लिए बैंक से ऋण लेकर रिक्शा का स्वामित्व मजदूरों को दिलाने का काम यूनियन के द्वारा कामरेड कपिलदेव प्रसाद के प्रयास से किया जाता रहा । धीरे-धीरे रिक्शा मजदूर सभा के बढ़ते संघर्ष और मजदूरों में बढ़ते प्रभाव बेतिया के अलावे सिवान , रक्सौल , मोतिहारी आदि शहरों में कॉमरेड कपिलदेव प्रसाद की मांग संगठन बनाने के लिए मजदूरों में बढ़ने लगी । कपिलदेव प्रसाद जो रिक्शा मजदूरों को संगठित करने की जवाबदेही ली थी । अब बिहार के कई जगहों पर रिक्शा मजदूरों का संगठन बनाने के साथ-साथ दूसरे क्षेत्र के असंगठित मजदूरों में भी का. कपिलदेव प्रसाद की मांग होने लगी । बीड़ी मजदूरों को बेतिया में संगठित किया । प्रेस इंप्लाइज यूनियन बनाई गई । सिनेमा कर्मचारी यूनियन , मोटर कर्मचारी संघ मे भी कपिलदेव प्रसाद की भागीदारी बढ़ती गई । देखते देखते दुकान कर्मचारी यूनियन , होटल कर्मचारी यूनियन , तांगा मजदूर यूनियन आदि संगठन की जवाबदेही कामरेड कपिलदेव प्रसाद की माथे पर आ गई । इस बीच रिक्शा मजदूर सभा के संस्थापक अध्यक्ष कामरेड सत्येंद्र नारायण मित्र के कुशल नेतृत्व अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ , जीवन बीमा निगम , प्राध्यापक संघ , पोस्ट ऑफिस कामचारी , बैंक कर्मचारी जैसे संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ समन्वय समिति बनाई गई ।
समन्वय समिति में भी का. कपिलदेव प्रसाद बड़ी भूमिका में आ गए। इनके प्रयास के बगैर समन्वय समिति की बैठक हो पाना संभव नहीं हो पाता था। समन्वय समिति से जुड़ने से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में संघर्ष के प्रति विश्वास बढ़ता गया ।

इसी बीच एस एफ आई के छात्र नेताओं के साथ रिक्शा रिक्शा मजदूरों की गाढ़ी दोस्ती बन गई। फिर क्या था । जहां भी रिक्शा मजदूरों पर हमले होते उनके समर्थन में एस एफ आई के साथी सैकड़ों की संख्या में खड़े हो जाते थे । रिक्शा पर बैठ कर घूमने वाले पैसे मांगने पर रिक्शा मजदूरों से झगड़े पर उतारू हो जाते थे। अब वैसे लोगों से उचित भाड़ा दिलाने के लिए छात्र नेता सामने आ जाते थे । उचित भाड़ा मांगने पर मजदूर को पिटाई करने वाले शहर के दादाओं के घरों तक एस एफ आई कार्यकर्ता पहुंच कर न केवल पैसे दिलाते । बल्कि मजदूरों पर हमले करने पर कठोर कारवाई की राजनीति भी दे देते । यह दोस्ती पुरे शहर में मजदूरों का मनोबल बढ़ा दिया और दादाओं में दहशत भर दिया । इसका लाभ एस एफ आई के साथियों को भी मिलता था । 1978 में आपातकाल के बाद रिक्शा मजदूर सभा का सम्मेलन राज देवढ़ी स्थित नौगोल में हुआ । उस सम्मेलन में रिक्शा मजदूरों की हजारों की उपस्थिति के साथ साथ समन्वय समिति से जुड़े सभी संगठनों ने सम्मेलन का अभिनंदन किया । इस सम्मेलन ने एक बार फिर का. सत्येंद्र नारायण मित्र को पुन: अध्यक्ष , का. कपिलदेव प्रसाद को महासचिव तथा का. प्रभुराज नारायण राव उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए । का. मित्रा के नहीं रहने के बाद वर्षों प्रभुराज नारायण राव कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे ।
का. कपिलदेव प्रसाद अपने पैतृक महल्ला गंज न. 2 और नौका टोला , यूसुफ मिस्त्री चौक के लोगों में भी चर्चित रहे । वहां के लोगों के दबाव में वार्ड न. 13 से वार्ड कमिश्नर के लिए चुनाव लडे और भारी वोटों से जीते । इस नाते अपने महल्ले के लोगो का सेवा करने का मौका भी का. कपिलदेव प्रसाद को मिला ।बेतिया के अलावे कई जगहों पर रिक्शा मजदूरों का संगठन बनाने के ख्याल से यूनियन का रजिस्ट्रेशन बिहार राज्य रिक्शा मजदूर सभा, मुख्य कार्यालय बेतिया के नाम से किया गया। चूंकि भागलपुर में का. अरुण कुमार मिश्र के नेतृत्व में रिक्शा यूनियन चल रहा था । इसलिए अध्यक्ष का. अरुण कुमार मिश्र को बनाया गया । जबकि महासचिव का. कपिलदेव प्रसाद हीं रहे । उपाध्यक्ष का. सैदुल्लाह को और मुझे बनाया गया । बाद के दिनों में भागलपुर का संगठन कमजोर पड़ गया और वार्षिक आम सभा में अध्यक्ष मुझे बनाया गया ।
का. कपिल देव जी अपने स्वास्थ्य के प्रति हमेशा लापरवाह रहते थे । 23 जून 2008 को करीब 4 बजे संध्या अचानक वह बेहोश हो गए । पार्टी के जिला मंत्री इंद्रासन प्रसाद उनके पास ही थे । देखते देखते और ज्यादा अस्वस्थ होते चले गए । मुझे भी सूचना दी गई । दौड़े हुए पहुंचा और उनको एमजेके अस्पताल बेतिया पहुंचाया गया । जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया । उसके बाद उनके पार्थिव शरीर को रिक्शा मजदूर सभा भवन लाया गया । आग की तरह यह सूचना पूरे शहर में फैल गई । उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी कतार लग गई । संध्या समय पार्टी के उपलब्ध नेतृत्व कारी साथियों की बैठक कर यह निर्णय हुआ कि 24 को सुबह 9 बजे रिक्शा मजदूर सभा भवन से उनके पार्थिव शरीर को लेकर संत घाट स्थित नहर के किनारे दाह संस्कार किया जाएगा । इस बीच पार्टी के पश्चिम चंपारण के जिला प्रभारी रामाश्रय सिंह को सूचना दे दी गई थी। सुबह 24 को वह भी पहुंच गए और जिले के कोने-कोने से पार्टी सदस्य और हमदर्द पहुंच गए । सैकड़ों की तादाद में उपस्थित लोगों के साथ कॉमरेड कपिलदेव प्रसाद अमर रहे की नारों के साथ उनके पार्थिव शरीर को लेकर नहर घाट की ओर चल दिए । जहां उन्हें मुखाग्नि देने का काम पार्टी के जिला मंत्री इंद्रासन प्रसाद ने किया। का. कपिलदेव जी के मृत्यु के 15 वीं साल के अवसर पर बिहार राज्य रिक्शा मजदूर सभा द्वारा 23 जून को श्रद्धांजलि सभा की जायेगी ।
श्रद्धांजलि सभा के बाद मजदूरों का महाभोज होगा । जो रात्रि तक चलता रहेगा ।
इस अवसर पर यूनियन की वार्षिक आम सभा भी होगी । जिसमें वर्तमान महासचिव का. शंकर कुमार राव द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा । संध्या समय पश्चिम चम्पारण जनवादी लेखक संघ द्वारा जिला सचिव अनिल अनल के दिशा निर्देशन में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आयोजित होगा ।

