नगर पंचायत का दर्जा मिलते ही कार्यापालक पदाधिकारी का खुला भ्रष्टाचार का द्वार नियम क्या कानून, कर डाला 6 करोड़ से अधिक का घोटाला

नगर पंचायत का दर्जा मिलते ही कार्यापालक पदाधिकारी का खुला भ्रष्टाचार का द्वार

नियम क्या कानून, कर डाला 6 करोड़ से अधिक का घोटाला

आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ नगर पंचायत पिपरा , सत्ता के संरक्षण में पहले एक बेलगाम कार्यपालक

 

जे टी न्यूज, सुपौल: अब नई कार्यापालक पदाधिकारी पहली ही पोस्टिंग में कर दिया 2.12 करोड़ का जेम क्रय घोटाला, पूर्व पदाधिकारी के सफाई घोटाला को आगे बढ़ाकर कर रहे गबन

:: अन्य एजेंसी का कागजात का इस्तेमाल कर फर्जी एजेंसी को मिला सफाई का काम, तीन साल 7 महीने तक 3.87 करोड़ का भुगतान

पत्रकार सह आरटीआई कार्यकर्ता सह जन सुराज नेता अनिल कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता कर मामले का किया खुलासा, कहा पहले ईओ ने घोटाला पर डाला पर्दा, घोटाला को लेकर जिले में चल रहा रैकेट, कई वरीय पदाधिकारी शामिल

सुपौल। (ब्यूरो चीफ प्रमोद यादव) पिपरा को नगर पंचायत का दर्जा क्या मिला, मानो विकास के नाम पर खजाना खोलने की छूट भी साथ में मिल गई। नियम-कानून फाइलों में बंद रह गए और जमीनी हकीकत में घोटालों की नई इबारत लिखी जाने लगी। पहले सफाई के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट, फिर नई कार्यापालक पदाधिकारी के आते ही जेम खरीद में 2.12 करोड़ का खेल कर दिया। दरअसल पंचायत बना पिपरा भ्रष्टाचार का नया अड्डा बन गया है। शनिवार को पत्रकार सह आरटीआई कार्यकर्ता सह जन सुराज नेता अनिल कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता कर इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत पिपरा में जेम सहित सफाई को मिलाकर 6 करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया है। सफाई के नाम पर नियम कानून को ताक पर रख खुलेआम करोड़ों के राजस्व का बंदरबांट हुआ। दूसरी एजेंसी का कागजात लगाकर फर्जी एजेंसी को पिछले तीन साल 7 महीने में 3.87 करोड़ का भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि सफाई कार्य के टेंडर में कुल छह कंपनी शामिल हुई। इसमें तकनीकी रूप से 4 का चयन हुआ और वित्तीय रूप से एक एजेंसी स्मार्ट वेस्ट वेंचर्स दरभंगा का चयन हुआ। स्मार्ट वेस्ट वेंचर्स के साथ 9 सितंबर को एकरारनामा भी कर दिया। लेकिन कागजात इकोस्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड का लगाया गया और अब तक इसी फर्जी कागजात पर एजेंसी को 3.87 लाख से अधिक का भुगतान हो चुका है। तत्कालीन ईओ कृष्णस्वरूप के इस कारनामें का नई ईओ प्रियंका कुमारी को जुलाई 2024 में पदभार ग्रहण करते ही हो गई लेकिन इसपर कार्रवाई के नई ईओ इस घोटाले को आगे बढ़ाते हुए अब अपने तरीके से गबन को अंजाम दे रही है।

तत्कालीन एडीएम और तत्कालीन ईओ के नेतृत्व में फर्जी एजेंसी का हुआ चयन:

फर्जी सफाई एजेंसी चयन कर घोटाला में तत्कालीन ईओ सहित जिला स्तरीय अधिकारी एडीएम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 6 सितंबर 2022 को सफाई कार्य के लिए निविदा निकाली गई थी। तत्कालीन एडीएम विधुभूषण चौधरी और तत्कालीन कृष्ण स्वरूप ने नेतृत्व में वित्तीय रूप से स्मार्ट वेस्ट वेंचर्स का चयन किया गया। कंपनी पूरी तरह से फर्जी थी बावजूद विभाग द्वारा निविदा में एजेंसी का हर कागजात पूरा बताया गया। एकरनामा के बाद दूसरी एजेंसी का कागजात लगाकर फर्जी एजेंसी को अब तक 3 पॉइंट 87 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।

जेम पोर्टल से 3.22 करोड़ की खरीदारी में 2.12 करोड़ का गबन: भ्रष्टाचार में वर्तमान ईओ प्रियंका कुमारी भी पुराने अधिकारियों से चार कदम नजर आ रही है। ईओ प्रियंका कुमारी ने अपने पहले ही पोस्टिंग में 2.12 करोड़ के जेम क्रय घोटाला को अंजाम दिया है। अर्टिगा कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 18 दिसंबर 2024 से 28 जनवरी 2026 यानी 13 माह में योग प्रियंका कुमारी द्वारा जेम पोर्टल के माध्यम से 3.30 करोड़ की अलग-अलग 15 आर्डर किए गए। हर भ्रष्ट पदाधिकारी की तरह ईओ प्रियंका कुमारी का पसंदीदा जिला बेतिया और गया रहा। और उन्होंने सारा काम यहीं के एजेंसी को दिया। बाजार से कहीं अधिक मूल्य पर सामानों की खरीदारी कर 2.12 करोड़ के घोटाला को अंजाम दिया गया है। सफाई और जेम पोर्टल की खरीदारी को जिम्मेदार सहायक स्वच्छता पदाधिकारी दीपेश कुमार के साथ मिली भगत कर ईओ द्वारा लगातार घोटाला को अंजाम दिया जा रहा है। जिले में इसके लिए एक रैकेट काम कर रहा है जिसमे जिला स्तर से लेकर कई वरीय पदाधिकारी शामिल है। अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जेम पोर्टल के जरिए की जा रही खरीद में बाजार मूल्य से अधिक दर पर सामान खरीदा जा रहा है। कई अधिकारी अपने पसंदीदा विक्रेताओं को ही काम देकर उन्हें लाभ पहुंचा रहे हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।अनिल कुमार सिंह ने कहा कि कागजों पर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी दिखती है, लेकिन अंदरखाने अलग खेल चल रहा है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि ईमानदार आपूर्तिकर्ताओं के लिए प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने आर्थिक अपराध इकाई से एडीएम विधुभूषण चौधरी, तत्कालीन ईओ कृष्ण स्वरूप ईओ प्रियंका कुमारी, तत्कालीन जेईई अजीत कुमार सहित अन्य भ्रष्ट पदाधिकारी के कार्यकाल की जांच की मांग की है।

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