जब मन लक्ष्य पर ठहरता है, सफलता स्वयं करीब आती है एकाग्रता बिखरी ऊर्जा को उपलब्धि में बदलने की शक्ति है बिमल सर्राफ

जब मन लक्ष्य पर ठहरता है, सफलता स्वयं करीब आती है

एकाग्रता बिखरी ऊर्जा को उपलब्धि में बदलने की शक्ति है
बिमल सर्राफ

जे टी न्यूज , रक्सौल, पूर्वी चंपारण:
सफलता की चाह हर व्यक्ति के भीतर होती है, लेकिन केवल इच्छा से सफलता नहीं मिलती। इसके लिए मेहनत के साथ एकाग्रता, धैर्य और सही दिशा जरूरी है। मनुष्य के पास प्रतिभा कितनी भी हो, यदि उसका मन बार-बार भटकता रहे तो उसकी क्षमता बिखर जाती है।

उक्त विचार लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 322ई जोन 41 के जोन चेयरपर्सन सह डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।
एकाग्रता का अर्थ है—अपने विचार, समय और ऊर्जा को एक निश्चित लक्ष्य की ओर केंद्रित करना। जैसे धनुष से निकला बाण तभी लक्ष्य को भेदता है, जब उसकी पूरी शक्ति एक दिशा में होती है। उसी प्रकार मनुष्य भी अपनी ऊर्जा को एक दिशा में लगाकर ही बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

आज मोबाइल, सोशल मीडिया और अनगिनत आकर्षण हमारे ध्यान को लगातार भटकाते हैं। ऐसे में यह तय करना जरूरी है कि हम अपने समय और ध्यान को नियंत्रित कर रहे हैं या परिस्थितियां हमें नियंत्रित कर रही हैं।

शांत मन सही निर्णय लेता है और स्पष्ट लक्ष्य निरंतर प्रयास की प्रेरणा देता है। इसलिए जीवन में सफलता पाने के लिए जरूरी है कि लक्ष्य स्पष्ट हो, दिशा सही हो और प्रयास लगातार जारी रहे।

क्योंकि जब मन भटकना छोड़कर लक्ष्य पर ठहर जाता है, तब बिखरी हुई ऊर्जा उपलब्धि में बदलने लगती है और सफलता स्वयं रास्ता खोज लेती है।

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