ट्रेड डील के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला फूंका
ट्रेड डील के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला फूंका

जे टी न्यूज, बेतिया: बिहार राज्य किसान सभा ने भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते (ट्रेड डील) के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला फूँक कर आक्रोशपूर्ण विरोध दर्ज किया।आज दिन के 3 बजे सीपीआईएम जिला कार्यालय से बिहार राज्य किसान सभा के बैनर तले दर्जनों किसानों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला लेकर सीपीआईएम जिला कार्यालय से ट्रेड डील के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मार्च किया।यह मार्च डाo भीमराव अम्बेडकर मार्ग के अनुमंडल कार्यालय तक पहुंच कर फिर वापस हॉस्पिटल चौक पहुंचा,जहां दोनों पुतलों को बिहार राज्य किसान सभा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिंह ने आग के हवाले कर दिया।मौके पर किसानों को संबोधित करते हुए बिहार राज्य किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष संजय कुमार ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार लगातार जनविरोधी नीतियां बना कर देश की आर्थिक स्थिति को ध्वस्त कर रही है।केन्द्र की मोदी सरकार पिछले दिनों देश में सर्वाधिक रोजगार पैदा करने बाली जो बड़ी_बड़ी कंपनियां थी,जिसमें सेल,गेल,भेल,रेल,कोयला,एल आई सी,दूरसंचार सहित कइयों को निजी हाथों में बेच कर देश की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर दिया।ऐसी स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था का एक मात्र रीढ़ किसानी बचा था,जिसने कोरोना काल में अपने दम पर भारत के अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक बचा कर रखने में सफलता हासिल किया था।संजय कुमार ने कहा भारत के 65०/० लोगों के रोजगार और आजीविका का साधन खेती है,ऐसे में खेती को बढ़ावा देने की नीतियां बनाने की जिम्मेदारी सरकार की है।उन्होंने कहा ठीक इसके उलट मोदी सरकार अभी हाल ही में अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया है,जिसमें अमेरिका के एकतरफा शर्तों पर हस्ताक्षर किया है।अमेरिका एक बड़े बाजार के रूप में भारत को ध्यान में रख कर यह ट्रेड डील किया है।

इस डील के अनुसार अमेरिका का अनाज और कच्चे माल बे रोकटोक भारत के बाजारों में आयगा,जिस पर मात्र 2.5 o/o आयात टैक्स लगेगा,जबकि भारत का अनाज या कच्चे माल अमेरिका के बाजारों में जायगा,तो 18 o/o टैक्स देना होगा।भारत के किसानों को खेतीबाड़ी में सरकार सब्सिडी ना के बराबर देती है,साथ ही भारत में ज्यादातर किसान 10 एकड़ से भी कम के जोरदार हैं,जबकि अमेरिका के किसानों को वहाँ की सरकार खेतीबाड़ी में 70 o/o सब्सिडी देती है और वहाँ जो सबसे छोटे किसान हैं,उनके पास न्यूनतम 400 एकड़ का फॉर्महाउस है,जिस कारण भारत के किसानों को फसल का लागत मूल्य अमेरिकी किसानों के वनिस्पत बहुत ज्यादा पड़ता है।जहीर सी बात है,कि अमेरिकी अनाज अगर भारत के बाजारों में आयी,तो काफी सस्ती होगी,जिस कारण भारतीय अनाजों का खरीददार नहीं होगा। अंतत: भारत के किसानों को खेतीबाड़ी बंद कर अपनी जमीनें कॉरपोरेट हाउसेस के पास या अमेरिकी कंपनियों के पास बाध्य होकर बेच देनी पड़ेगी।भारत एक तरह से आने बाले दिनों में अनाज के मामले में भी अमेरिका का गुलाम हो जाएगा।उन्होंने कहा भारत के किसानों के सामने अपना खेत और खेती बचाने के लिए 2020 से 2021 तक तीन काले कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली के बोर्डरों पर चलाए गए एक साल तक की निर्णायक आंदोलनों जैसी आंदोलन करना पड़ेगा,जिसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा के किसानों ने कर दी है।मौके पर मौजूद लोगों को सीपीआईएम जिला सचिव सुरेन्द्र प्रसाद,किसान सभा के जिला सचिव विनय कुमार सिंह, वरिष्ठ किसान नेता विजय कुमार सिंह और किसान सभा के जिला नेता कुन्दन मेहता ने भी संबोधित किया।अपने संबोधन में नेताओं ने पिछले 20 जुलाई 026 को दिल्ली जंतर मंतर से संसद मार्च कर रहे देश के लाखों निहत्थे छात्रों पर केन्द्र सरकार की दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कातिलाना हमले की तीखी निंदा करते हुए कहा,कि नीट पेपर लीक कांड के खिलाफ लाखों छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जनतंत्र में अपनी बात रखने का एक तरीका था,मगर दिल्ली पुलिस का कूर हमला,जिसमें सैकड़ों बच्चे घायल हुए,कई तो जिंदगी की जंग लड़ रहें हैं,ने ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा जलियांवालाबाग के याद को ताजा कर दी।

नेताओं ने इस घटना के जिम्मेदार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए,जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के साथ एकजुटता का ऐलान किया।
आज के कार्यक्रम में जिला किसान कौंसिल के नेता अनिल वर्मा,संजीव कुमार,खेतिहर मजदूर यूनियन के जिला सचिव रामविनय सिंह,माला देवी और रामचन्द्र सहनी सहित दर्जनों किसान कार्यकर्ता शामिल हुए।
