दिल्ली जंतर मंतर से आँखो देखी–प्रभुराज नारायण राव
दिल्ली जंतर मंतर से आँखो देखी–प्रभुराज नारायण राव

जे टी न्यूज, नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपिके के नेतृत्व में जंतर मंतर नई दिल्ली में छात्रों का आमरण अनशन ,धरना ,प्रदर्शन लगातार चल रहा है ।20 जुलाई को जिस निर्ममता पूर्वक एवं बर्बर पुलिस कार्रवाई की गई। वह भारतीय लोकतंत्र को तार तार कर देता है ।उस प्रदर्शन पर पुलिस का वहशीपन आरएसएस भारतीय जनता पार्टी के गुंडो के द्वारा बर्बर हमले ,यह मोदी सरकार की फासीवादी चरित्र को दिखला रहा था ।सत्ता की लोलुपता किसी भी हदों को पार करते दिखी। पुलिस और गुंडो की सामूहिक गुंडागर्दी की पूरी तैयारी करा कर मोदी सरकार ने बच्चे और बच्चियों को रौंदने की खुली छूट दे रखी थी।लग रहा था कि आतंकवादियों से भी ज्यादा बड़ा अपराधी गिरोह है।जो देश के शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने आया है।कहीं इससे ऊपर उठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्तीफे की मांग करने नहीं लगे।यह सत्ता की राक्षसी भूख हद की हदों को भी पार कर गया।
सैकड़ो बार बेरहमी से लाठियां बरसाई गई। कंटीलेदार लाठियों से छात्र और छात्राओं को गोदा गया।आंसू गैस के हजारों गोले के धुएं से अंधे बच्चों को अंधाधुन पीटा गया।वाटर कैनन का भारी इस्तेमाल किया गया।वहशी गुंडे और पुलिस वाले महिलाओं के नाजुक अंगों में लाठियां घुसेड़ते देखे गए।
प्रधानमंत्री आप भूल गये कि ये वहीं बच्चे हैं।जो कल मोदी मोदी करते थे।आज सरकार से अपनी भविष्य की रक्षा के लिए परीक्षा में पेपर लीक करने वाले दोषियों पर कार्रवाई की ही तो मांग कर रहे हैं।देश के अंदर एक स्वस्थ्य परंपरा बनाने की ही तो मांग कर रहे हैं।लेकिन देश रहे या न रहे ।आप यह मांग कैसे मान लेते।क्योंकि सारे भ्रष्टाचारी ,दुराचारी, व्याभिचारी,बलात्कारी,अत्याचारी ही तो आपकी शक्ति हैं।इसे कोई मिटाने की बात करेगा तो आप कैसे स्वीकार करते।इन्हीं के बल पर तो आपकी सरकार चल रही है। आपने ही तो अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा दी।मंदिर में दान और चढ़ावा भी तो आपके ही खाने के लिए मिलते हैं और आपके चेलों को लोग हटाने की बात कर रहे हैं। आप उन्हें कैसे छोड़ेंगे।गद्दी की रक्षा के लिए लाखों की कुर्बानियां दी जा सकती है।लेकिन आप सत्ता नहीं गवां सकते ।

लेकिन एक आवाज जो अब गांवों तक पहुंच गई है।वह तरुनाई अब दिल्ली का रुख कर दिया है।अब वह कहां रुकने वाला।वह निकल रहा है खेतों से,खलिहानों से,खदानों से,कारखानों से,विद्यालय, विश्वविद्यालयों से वह तुम्हारी दमनकारी सरकार को जो अब धर्म की बैशाखी पर खड़ी है।उखाड़ फेंकने को आतुर है।एक नयी व्यवस्था बनाने को अग्रसर है।

