विश्वविद्यालय ‘नॉलेज इंडस्ट्री’ के रूप में काम करे- प्रो मुनेश्वर यादव

विश्वविद्यालय ‘नॉलेज इंडस्ट्री’ के रूप में काम करे- प्रो मुनेश्वर यादव

विश्वविद्यालय ‘नॉलेज इंडस्ट्री’ के रूप में काम करे- प्रो मुनेश्वर यादव

शिक्षक समाज का सबसे सम्मानित व्यक्ति– डॉ दिव्या रानी हंसदा

जे टी न्यूज, दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय अंतर्गत शिक्षाशास्त्र विभाग, बी.एड. (नियमित) में मंगलवार को बी.एड. (सत्र 2026–28) के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए दीक्षारंभ-सह-वर्गारंभ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, शिक्षक-प्रशिक्षण की प्रकृति तथा भावी शिक्षक के रूप में उनके दायित्वों से परिचित कराना था। समारोह के आरम्भ में आगंतुक अतिथियों- मुख्य अतिथि प्रो मुनेश्वर यादव, प्राध्यापक, विश्वविद्यालय राजनीति शास्त्र विभाग, विशिष्ट अतिथि डॉ दिव्या रानी हंसदा, कुलसचिव, ल. ना. मिथिला विश्वविद्यालय एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो हरे कृष्ण सिंह का पाग, चादर एवं पौधा से किया गया इसके बाद अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इसके पश्चात द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गान प्रस्तुत किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो मुनेश्वर यादव, पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय राजनीति शास्त्र विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक और शिक्षण संस्थान ‘इंडस्ट्री ऑफ नॉलेज’ के रूप में कार्य करते हैं, जहां नए विचारों और ज्ञान का सृजन होता है। इसलिए शिक्षक को सदैव सृजनात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत की लगभग 35 प्रतिशत आबादी युवा है, लेकिन शिक्षा पर अपेक्षित स्तर के अनुरूप संसाधनों का निवेश आज भी एक महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों को सदैव सकारात्मक सोच रखने और गरिमापूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का रहन-सहन, व्यवहार और व्यक्तित्व समाज को संदेश देता है, इसलिए शिक्षक के ज्ञान, विचार और आचरण में उचित समन्वय होना आवश्यक है। प्रो यादव ने शिक्षक की तुलना एक मां से करते हुए कहा कि जिस प्रकार मां अपने बच्चों से निःस्वार्थ प्रेम करती है, उसी प्रकार शिक्षक को भी अपने विद्यार्थियों के प्रति स्नेह, संवेदना और जिम्मेदारी का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक चाणक्य या गांधी नहीं बन सकता, लेकिन उनके आदर्शों की दिशा में प्रयास अवश्य कर सकता है।
समारोह में विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. दिव्या रानी हांसदा ने कहा कि शिक्षक समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सम्मानित व्यक्ति होता है। एक अच्छे शिक्षक के निर्माण की पहली शर्त अनुशासन और अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदारी है। उन्होंने अपने शिक्षकों को स्मरण करते हुए उनके योगदान की चर्चा की तथा भावी शिक्षकों से कहा कि वे अपने पेशे और दायित्वों के प्रति सदैव निष्ठावान रहें। शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के साथ-साथ पूरे समाज को प्रभावित करता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो एच. के. सिंह ने अपने संबोधन में प्रसिद्ध शिक्षाविद् जॉन ड्यूई के ‘गार्डन थॉट’ की चर्चा करते हुए शिक्षा और शिक्षक की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक माली पौधों की प्रकृति और आवश्यकता को समझकर उनके समुचित विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है, उसी प्रकार शिक्षक का दायित्व विद्यार्थियों की अंतर्निहित क्षमताओं को पहचानकर उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करना है।
प्रो सिंह ने विशेष रूप से कहा कि एक शिक्षक में Head, Heart and Hand अर्थात् मस्तिष्क, हृदय और हाथ का उचित समन्वय होना चाहिए। शिक्षक के पास ज्ञान और विवेक के लिए मस्तिष्क, संवेदना एवं मानवीय मूल्यों के लिए हृदय तथा ज्ञान को व्यवहार और कर्म में उतारने के लिए कुशल हाथ होने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के निर्माण में शिक्षक की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, इसलिए उसके विचार, संवेदना और कर्म में संतुलन आवश्यक है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष डॉ अरविन्द कुमार मिलन ने अतिथियों एवं नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए बी.एड. पाठ्यक्रम, विभागीय गतिविधियों तथा एक भावी शिक्षक के रूप में उनकी भूमिका और दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बी.एड. में प्रवेश लेते समय विद्यार्थियों के मन में यह लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए कि वे केवल उपाधि प्राप्त करने नहीं, बल्कि एक योग्य, संवेदनशील और आदर्श शिक्षक बनने आए हैं। शिक्षक-प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य ज्ञान के साथ व्यक्तित्व, अनुशासन और उत्तरदायित्व का विकास करना है।


कार्यक्रम में शिक्षाशास्त्र विभाग के शिक्षक डॉ शुभ्रा, डॉ कुमारी स्वर्ण रेखा, डॉ उदय कुमार, कुमार सत्यम, गोविन्द कुमार, डॉ श्वेता झा, डॉ अक्षय कुमार, डॉ मो सबिहुर रहमान, डॉ कन्हैया कुमार पाण्डेय, डॉ नम्रता पराशर एवं सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। समारोह का मंच संचालन डॉ निधि वत्स ने किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में डॉ रेशमा तबस्सुम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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