सरकारी विद्यालयों की खेल प्रतिभाओं पर निजी स्कूलों का दबदबा, जिला स्तरीय प्रतियोगिता ने खोली शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर
सरकारी विद्यालयों की खेल प्रतिभाओं पर निजी स्कूलों का दबदबा, जिला स्तरीय प्रतियोगिता ने खोली शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर

समस्तीपुर। जिला स्तरीय विद्यालय खेल-कूद प्रतियोगिता 2026-27 के दूसरे दिन पटेल मैदान, खेल भवन एवं पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल परिसर में खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में कई सरकारी विद्यालयों के खिलाड़ियों ने भी पदक हासिल किए, लेकिन विभिन्न स्पर्धाओं के परिणामों पर नजर डालें तो निजी विद्यालयों के खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी ने सरकारी विद्यालयों की खेल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
100 मीटर बालिका वर्ग में पोद्दार इंटरनेशनल स्कूल की मानसी सिन्हा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि बालक वर्ग में डीएवी के प्रिंस कुमार दूसरे स्थान पर रहे। बैडमिंटन के अंडर-14 बालक वर्ग में डीएवी के रवि राज और बालिका वर्ग में पटोरी की श्रेया विजेता बनीं। वहीं अंडर-17 बैडमिंटन में भी निजी विद्यालयों के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया।

कबड्डी में संत स्टीफन दलसिंहसराय ने अंडर-14 बालक और बालिका दोनों वर्गों में चैंपियन बनकर अपनी मजबूत खेल तैयारी का परिचय दिया। दूसरी ओर सरकारी विद्यालयों के कुछ खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का दम दिखाया। उच्च विद्यालय कर्पूरीग्राम के मो. अल्तमश ने अंडर-17 गोला फेंक में स्वर्ण पदक हासिल किया। नरहन, पूसा, सरायरंजन, शादीपुर और अन्य सरकारी विद्यालयों के खिलाड़ियों ने भी विभिन्न स्पर्धाओं में स्थान प्राप्त किया।
इन परिणामों ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है—क्या सरकारी विद्यालयों में खेल प्रतिभाओं की कमी है या उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण, संसाधन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं?
सरकारी विद्यालयों में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन कई स्कूलों में खेल मैदान, खेल सामग्री, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और नियमित अभ्यास की व्यवस्था सीमित है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले प्रतिभावान बच्चों को उचित प्रशिक्षण और अवसर नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, संसाधनयुक्त निजी विद्यालय नियमित प्रशिक्षण, बेहतर उपकरण और प्रतियोगिताओं की तैयारी पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान देते हैं।

जिला खेल पदाधिकारी विवेक कुमार शर्मा के अनुसार जिले के विभिन्न विद्यालयों से सैकड़ों खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं। चयनित खिलाड़ियों का जैवमितीय सत्यापन कराने के बाद जिला टीम का गठन किया जाएगा, जो प्रमंडल स्तरीय प्रतियोगिता में समस्तीपुर का प्रतिनिधित्व करेगी।
प्रतियोगिता के नतीजे जहां विजेता खिलाड़ियों के लिए उत्साह का विषय हैं, वहीं सरकारी विद्यालयों में खेल सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करते हैं। यदि ग्रामीण और सरकारी विद्यालयों की प्रतिभाओं को पर्याप्त मैदान, प्रशिक्षक, उपकरण और नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, तो इन विद्यालयों से भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं।

सवाल पदक जीतने वाले बच्चों की प्रतिभा का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो सरकारी विद्यालयों के हजारों प्रतिभाशाली बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने में अभी भी पीछे दिखाई देती है।




