बस स्टैंड पर झाड़ू, महिला कॉलेज के रास्ते में गंदगी और दुर्गंध: क्या फोटो खिंचवाने तक सीमित है स्वच्छता अभियान?

पेशाब की तेज दुर्गंध से छात्राएं, शिक्षक और कर्मचारी परेशान; नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

बस स्टैंड पर झाड़ू, महिला कॉलेज के रास्ते में गंदगी और दुर्गंध: क्या फोटो खिंचवाने तक सीमित है स्वच्छता अभियान?

पेशाब की तेज दुर्गंध से छात्राएं, शिक्षक और कर्मचारी परेशान; नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: जिला प्रशासन की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत स्वच्छता का संदेश देने के लिए बस स्टैंड परिसर में बड़े अधिकारियों के हाथों में झाड़ू नजर आई और सफाई अभियान चलाया गया। तस्वीरें भी सामने आईं। लेकिन इसी अभियान की जमीनी हकीकत शहर के बस स्टैंड से महिला कॉलेज की ओर प्रवेश करते ही कुछ और ही कहानी बयां करती है।

महिला कॉलेज में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का स्वागत साफ-सफाई से नहीं, बल्कि बस स्टैंड के आसपास फैली गंदगी और पेशाब की तेज दुर्गंध से होता है। स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि कॉलेज की ओर जाने वाले लोगों को नाक पर कपड़ा रखकर रास्ता पार करना पड़ता है।

एक तरफ झाड़ू और फोटो, दूसरी तरफ दुर्गंध

सवाल यह है कि जब स्वच्छता अभियान के तहत जिले के बड़े अधिकारी स्वयं झाड़ू लेकर सफाई का संदेश दे रहे हैं, तब शहर के एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के प्रवेश मार्ग की इस स्थिति पर प्रशासन और नगर निगम की नजर क्यों नहीं पड़ रही?

महिला कॉलेज के मुख्य प्रवेश मार्ग के आसपास लंबे समय से बनी इस समस्या से महाविद्यालय प्रशासन भी परेशान बताया जा रहा है। कॉलेज में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्राएं, शिक्षक, कर्मचारी और अभिभावक आते-जाते हैं। ऐसे में प्रवेश मार्ग पर गंदगी और दुर्गंध न केवल असुविधा का कारण बन रही है, बल्कि स्वच्छता अभियान के दावों पर भी सवाल खड़े कर रही है।

महिला कॉलेज प्रशासन की परेशानी बढ़ी

महाविद्यालय प्रशासन के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है। कॉलेज के प्रवेश मार्ग पर गंदगी और दुर्गंध के कारण छात्राओं एवं अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

जरूरत इस बात की है कि अभियान के दौरान फोटो खिंचवाने के साथ-साथ उन स्थानों की भी नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, जहां रोज हजारों लोगों की आवाजाही होती है। बस स्टैंड और महिला कॉलेज जैसे सार्वजनिक एवं शैक्षणिक स्थलों के आसपास स्वच्छता की स्थायी व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्वच्छता अभियान की असली सफलता झाड़ू और कैमरे के सामने नहीं, बल्कि उस समय दिखाई देगी जब महिला कॉलेज में प्रवेश करने वालों का स्वागत गंदगी और दुर्गंध नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण करेगा।

‘स्वच्छता’ पर खर्च, लेकिन परिणाम कहां?

जिला गंगा समिति एवं संबंधित विभागों की ओर से स्वच्छता और नदी संरक्षण के नाम पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। कार्यक्रम, जागरूकता, शपथ, हस्ताक्षर अभियान और फोटो सत्र भी हो रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या स्वच्छता केवल एक दिन झाड़ू लगाने और तस्वीर खिंचवाने तक सीमित रह जाएगी?

स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि अभियान पर धन खर्च हो रहा है, तो उसके स्थायी परिणाम शहर की सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास क्यों नहीं दिखाई देते?

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