मक्का बीज और खाद की कालाबाजारी पर संयुक्त किसान मोर्चा का हमला बेगूसराय मक्का अनुसंधान
बेगूसराय मक्का अनुसंधान केंद्र की व्यवस्था की जांच की मांग, खाद की कथित अधिक कीमत पर किसानों की लूट का लगाया आरोप
मक्का बीज और खाद की कालाबाजारी पर संयुक्त किसान मोर्चा का हमला
बेगूसराय मक्का अनुसंधान केंद्र की व्यवस्था की जांच की मांग, खाद की कथित अधिक कीमत पर किसानों की लूट का लगाया आरोप
जे टी न्यूज, खगड़िया: मक्का बीज की उपलब्धता, खाद की कथित कालाबाजारी और किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार ने सरकार और कृषि विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मोर्चा ने बेगूसराय स्थित मक्का अनुसंधान केंद्र की व्यवस्था की जांच कराने के साथ ही खाद-बीज की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मोर्चा ने कहा कि बिहार में मक्का की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेगूसराय में पूर्वोत्तर भारत का मक्का अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है। करीब 70 एकड़ क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बीज तैयार किए जाने की बात कहते हुए मोर्चा ने सवाल उठाया कि यहां तैयार आधार बीज दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं, जबकि बिहार के किसानों को महंगे दाम पर बाहर से बीज खरीदना पड़ रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया कि कुछ बीज कारोबारियों का कृषि विभाग पर प्रभाव है और कथित तौर पर नकली बीज एवं कृषि इनपुट की आपूर्ति तथा किसानों को मिलने वाली सब्सिडी में अनियमितता की जा रही है। मोर्चा ने इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो किसान आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

खाद की कीमतों को लेकर भी उठाए सवाल
मोर्चा ने बिहार में खाद की कथित कालाबाजारी का मुद्दा भी उठाया। नेताओं का दावा है कि 266 रुपये वाले यूरिया के बैग को 400 रुपये और 1350 रुपये वाले डीएपी को 1900 रुपये तक में बेचने की शिकायतें मिल रही हैं। मोर्चा ने कृषि विभाग पर खाद माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि कृषि मंत्री की ओर से किसानों को उचित कीमत पर खाद उपलब्ध होने के दावे किए जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग होने का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने बेगूसराय के जिला प्रशासन से खाद की उपलब्धता, बिक्री मूल्य और वितरण व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि विभाग के आंकड़ों पर भी सवाल उठाते हुए धान के आच्छादन से संबंधित रिपोर्ट की जांच कराने की मांग की। मोर्चा ने बेगूसराय के जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की अपील की।

बरौनी डेयरी मामले का भी उठाया मुद्दा
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अशोक प्रसाद सिंह ने कहा कि जिले के जनप्रतिनिधियों को किसानों की समस्याओं को गंभीरता से उठाना चाहिए। उन्होंने बरौनी डेयरी में किसानों के भुगतान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मोर्चा ने इस मुद्दे को उठाया और पत्रकारों ने भी इसे प्रमुखता दी।
उन्होंने दावा किया कि जांच के आधार पर बरौनी डेयरी के पूर्व प्रबंध निदेशक और वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ फुलवरिया थाना में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने इसे किसानों के संघर्ष का परिणाम बताया।
किसानों की जमीन नहीं देने की चेतावनी
मोर्चा नेता दिनेश कुमार ने कहा कि तमाम विकास के बावजूद भारत आज भी कृषि और गांवों पर आधारित देश है। उन्होंने कहा कि गांव और खेती के विकास के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने के लिए कृषि भूमि और गांवों को प्रभावित करने वाली नीतियां ला रही है। उन्होंने ग्रीनलैंड, सैटेलाइट टाउनशिप और लैंड पूलिंग के नाम पर किसानों की जमीन लिए जाने की आशंका जताते हुए इसका विरोध किया।
दिनेश कुमार ने कहा कि किसानों को ऐसा विकास स्वीकार नहीं है, जिसमें उनकी खेती और जमीन प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि गांवों का विकास हो और उन्हें बेहतर सुविधाओं से युक्त स्मार्ट गांव बनाया जाए, लेकिन किसानों की जमीन छीनकर विकास परियोजनाएं लागू करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मोर्चा ने स्पष्ट किया कि किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दों पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि “किसान अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं देंगे।”


