वीमेंस कॉलेज में मनाई गई लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती

वीमेंस कॉलेज में मनाई गई लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंतीIk

प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने किया दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित, वक्ताओं ने संपूर्ण क्रांति और लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर डाला प्रकाश
जे टी न्यूज।
समस्तीपुर, 12 अक्टूबर। वीमेंस कॉलेज, समस्तीपुर के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से सोमवार को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती समारोह आयोजित किया गया। 11 अक्टूबर को अवकाश होने के कारण समारोह का आयोजन एक दिन बाद किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्पांजलि अर्पित कर लोकनायक को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुई।

प्रधानाचार्य प्रो. राजेश कुमार रंजन ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण का जीवन त्याग, जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रेरक उदाहरण है। भारतीय लोकतंत्र में उनका योगदान जनआंदोलनों, नागरिक अधिकारों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण क्रांति का आह्वान केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यवस्था में व्यापक सुधार और समाज में सकारात्मक बदलाव की आकांक्षा को व्यक्त करता था। महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को महान राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के विचारों से परिचित कराकर उनमें लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों का विकास करें।

राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मधुलिका मिश्रा ने कहा कि जयप्रकाश नारायण भारतीय लोकतांत्रिक चेतना, सामाजिक न्याय और जनभागीदारी की राजनीति के प्रमुख प्रतीक रहे हैं। संपूर्ण क्रांति का उनका विचार राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और नैतिक जीवन में व्यापक परिवर्तन की परिकल्पना करता था। उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र की मजबूती, भ्रष्टाचार के विरोध और सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।

डॉ. सोनी सलोनी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं मानते थे। उनके विचार में राजनीति का उद्देश्य समाज में नैतिकता, सेवा और न्याय की स्थापना होना चाहिए। महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो. सुरेश साह ने कहा कि जेपी के विचार आज भी लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रासंगिक हैं।

डॉ. विजय गुप्ता ने कहा कि जयप्रकाश नारायण के अनुसार लोकतंत्र की सार्थकता तभी है, जब शासन व्यवस्था जनता के प्रति जवाबदेह हो। वर्तमान समय में पारदर्शिता, नैतिकता और उत्तरदायी प्रशासन की आवश्यकता को समझने के लिए उनके विचार महत्वपूर्ण हैं। डॉ. नेहा जायसवाल ने जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक विचारों का उल्लेख करते हुए पंचायती राज और विकेंद्रीकरण की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनके सामाजिक एवं राजनीतिक विचार वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं।

प्रो. रंजन कुमार ने जयप्रकाश नारायण के सामाजिक विचारों पर डॉ. राममनोहर लोहिया के सामाजिक दर्शन के प्रभाव का उल्लेख किया। वहीं, प्रो. फरहत जबीन ने जेपी के व्यक्तित्व और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में डॉ. स्मिता झा ने छात्राओं को जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरणा लेते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने, सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनने और समाज के विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी शिक्षकों, शिक्षिकाओं और छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

राजनीति विज्ञान की छात्रा हिमांशी झा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। हिमांशी झा, युविका श्रीवास्तव, खुशी, जया भारती, पुष्पांजलि, साक्षी, निधि, काजल, आरुषि, संध्या, कोमल, प्रिया, शीला भारती, आशिका और ज्योति सहित अन्य छात्राओं ने भाषण के माध्यम से जेपी के व्यक्तित्व एवं विचारों पर प्रकाश डाला। अमीषा, सत्या और दिव्या ने कविता-पाठ प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्राएं और शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे।

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