कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को वैश्विक महाशक्ति बनाने की ओर अग्रसर भारत : प्रो. एस. महेंद्र देव मुजफ्फरपुर में इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन; डॉ. अनिल कुमार ठाकुर के त्याग और समर्पण की हुई विशेष सराहना
कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को वैश्विक महाशक्ति बनाने की ओर अग्रसर भारत : प्रो. एस. महेंद्र देव
मुजफ्फरपुर में इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन; डॉ. अनिल कुमार ठाकुर के त्याग और समर्पण की हुई विशेष सराहना 
जे टी न्यूज,
मुजफ्फरपुर। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि 140 करोड़ से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए भारत अब मजबूत विनिर्माण और डिजिटल महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके लिए अर्थव्यवस्था में व्यापक संरचनात्मक बदलाव और निरंतर सुधार आवश्यक हैं।
वे बुधवार को मुजफ्फरपुर के कृष्णापुरी स्थित इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था इस समय बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है। कृषि क्षेत्र का नेतृत्व करने वाली अर्थव्यवस्था को मजबूत औद्योगिक आधार और आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना समय की मांग है।
प्रो. महेंद्र देव ने आगे कहा कि भारत के सामने विकास के नए अवसरों के साथ कई चुनौतियां भी हैं।

संरचनात्मक रूपांतरण की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करना और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत बदलाव करना जरूरी है। उन्होंने संरक्षणवाद के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को निर्यात को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाना होगा। इसके लिए वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
डॉ. अनिल कुमार ठाकुर का त्याग और समर्पण बना केंद्रीय कार्यालय की स्थापना का आधार
इस अवसर पर इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय की स्थापना में डॉ. अनिल कुमार ठाकुर के महत्वपूर्ण योगदान और असाधारण त्याग की विशेष चर्चा हुई। परिषद के केंद्रीय कार्यालय के लिए उन्होंने अपने आवास को उपलब्ध कराकर संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और समर्पण का परिचय दिया है। उनका यह कदम परिषद के संस्थागत विकास के प्रति उनकी निष्ठा का उदाहरण है।
डॉ. अनिल कुमार ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि जब तक परिषद को राजधानी में स्थायी कार्यालय के लिए उपयुक्त भूमि अथवा भवन आवंटित नहीं हो जाता, तब तक उनका घर ही इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन का केंद्रीय कार्यालय बना रहेगा। उन्होंने यह भी संकल्प व्यक्त किया कि उनका आवास आजीवन और उनके बाद भी परिषद के केंद्रीय कार्यालय के रूप में उपलब्ध रहेगा। उनका यह निर्णय परिषद के प्रति व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर उठकर किए गए संस्थागत समर्पण को दर्शाता है। उपस्थित शिक्षाविदों एवं गणमान्य लोगों ने उनके इस योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इकोनॉमिक स्टडीज एंड प्लानिंग के प्रो. प्रवीण झा ने की। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर विचार रखते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, लेकिन विकास की गति बनाए रखने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
इस अवसर पर इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुजफ्फरपुर में केंद्रीय कार्यालय की स्थापना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वक्ताओं ने कहा कि इससे आर्थिक शोध, अकादमिक विमर्श और नीतिगत संवाद को प्रोत्साहन मिलेगा। परिषद का केंद्रीय कार्यालय शोधार्थियों, शिक्षकों और अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी मंच साबित हो सकता है।

कार्यक्रम में भारतीय सांख्यिकी संस्थान के पूर्व कुलपति डॉ. तम्मा कोटि रेड्डी, परिषद के महासचिव प्रो. ब्रज के. ब्रह्मे, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक प्रो. अश्विनी महाजन, प्रो. सुधांशु भूषण एवं प्रो. बी. सुरेश लाल सहित कई शिक्षाविदों और अर्थशास्त्रियों ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर एमआरपीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार सिंह, शिक्षक एवं पूर्व कुलसचिव प्रो. संजय कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
मुजफ्फरपुर में इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय की स्थापना न केवल बिहार में आर्थिक अध्ययन, शोध और नीतिगत विमर्श को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि डॉ. अनिल कुमार ठाकुर के समर्पण और त्याग ने इस संस्थागत पहल को एक विशेष पहचान भी दी है।
बिहार के ग्रामीण समाज और अर्थव्यवस्था में स्वतंत्रता के बाद आए बदलावों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल के रूप में वीमेंस कॉलेज, समस्तीपुर के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. विजय कुमार गुप्ता की पुस्तक ‘बिहार में ग्रामीण विकास : स्वतंत्रता से डिजिटल युग तक’ का विमोचन किया गया।


