पत्नी, प्रेमी और सुपारी_किलर: चलती ट्रेन में रची गई हत्या की साजिश, सुपौल की एमवीआई समेत तीन गिरफ्तार

पत्नी, प्रेमी और सुपारी_किलर: चलती ट्रेन में रची गई हत्या की साजिश, सुपौल की एमवीआई समेत तीन गिरफ्तार


जे टी न्यूज़, कटिहार/सुपौल : पुणे के चर्चित ‘केतन हत्याकांड’ और मेघालय के ‘राजा रघुवंशी हत्याकांड’ जैसी घटनाओं की याद दिलाने वाले एक सनसनीखेज मामले का खुलासा बिहार में हुआ है। रेल पुलिस ने बिजली विभाग के तकनीकी कर्मी देव कुमार गुंजन की हत्या के मामले में उनकी पत्नी, सुपौल में पदस्थापित मोटरयान निरीक्षक (एमवीआई), उसके कथित प्रेमी और एक कथित शूटर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, हत्या को लूटपाट का रूप देने के लिए चलती ट्रेन में गोली मारकर वारदात को अंजाम दिया गया।रेल पुलिस के मुताबिक, 11 जून को मानसी रेल थाना क्षेत्र के बदलाघाट के समीप जनसाधारण एक्सप्रेस में झारखंड के गोड्डा निवासी तथा जामुई में कार्यरत बिजली विभाग के कर्मचारी देव कुमार गुंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में इसे लूटपाट के दौरान हुई हत्या बताया गया था, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और पूछताछ के आधार पर मामला पूरी तरह अलग निकला।जांच में सामने आया कि मृतक की पत्नी, जो सुपौल में एमवीआई के पद पर कार्यरत है, का नालंदा में कार्यरत बिजली विभाग के एक ग्रेड-वन तकनीशियन से कथित प्रेम संबंध था। पुलिस का दावा है कि पति इस संबंध में बाधा बन रहे थे। इसके बाद दोनों ने कथित रूप से चार लाख रुपये में सुपारी देकर हत्या की साजिश रची।रेल पुलिस के अनुसार, सुपारी किलर ने चलती ट्रेन में देव कुमार गुंजन को गोली मारी ताकि घटना को सामान्य लूटपाट का मामला दिखाया जा सके। हालांकि, तकनीकी जांच ने कथित साजिश की परतें खोल दीं। पुलिस ने पत्नी, उसके कथित प्रेमी और शूटर को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है।
रेल पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शुरुआती कहानी और तकनीकी साक्ष्यों में भारी अंतर मिलने के बाद जांच की दिशा बदली गई। कॉल डिटेल, आपसी संपर्क और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित षड्यंत्र का खुलासा हुआ।यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के वर्षों में देश में वैवाहिक विवादों और कथित प्रेम संबंधों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल हत्याकांड सामने आए हैं। हालांकि, इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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