समस्तीपुर में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन: 8 निजी अस्पतालों को नोटिस

गंभीर अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की दी गई चेतावनी

समस्तीपुर में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन: 8 निजी अस्पतालों को नोटिस

गंभीर अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की दी गई चेतावनी

जे टी न्यूज, समस्तीपुर: जिले में निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम की कार्यप्रणाली पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई लेते हुए 8 निजी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सदर एसडीओ की औचक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने जांच में सामने आई गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए संबंधित अस्पताल प्रबंधन से निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण मांगा मांग गया है।
जांच के दौरान कई अस्पतालों में एक्सपायर्ड ऑक्सीजन सिलेंडर, बिना वैध दस्तावेज अस्पताल संचालन, डॉक्टरों की अनुपस्थिति, फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी, साफ-सफाई की कमी तथा इन्फेक्शन कंट्रोल में गंभीर लापरवाही जैसी खामियां पायी गई। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें कमला इमरजेंसी हॉस्पिटल, यूनिटी इमरजेंसी हॉस्पिटल, मां जगदंबा इमरजेंसी, मातृका हॉस्पिटल, न्यू वेदांता हॉस्पिटल, सुशीला हॉस्पिटल, आरबी शर्मा नर्सिंग होम तथा सोनावती हॉस्पिटल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और जिले के सभी निजी अस्पतालों में नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

उठ रहे बड़े सवाल:-

इस कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने खड़े हो गए हैं। यदि इन अस्पतालों में इतनी गंभीर अनियमितताएं पहले से मौजूद थीं, तो इन्हें आयुष्मान भारत (PM-JAY) जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत मरीजों का इलाज करने की अनुमति कैसे मिली? क्या इन अस्पतालों का समय-समय पर प्रभावी निरीक्षण नहीं किया गया? यदि निरीक्षण हुआ था, तो ये कमियां पहले क्यों नहीं पकड़ी गईं? और यदि अब इतनी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल अस्पताल प्रबंधन की है या निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए?
हालांकि, इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। स्वास्थ्य विभाग की आगे की कार्रवाई और संबंधित अस्पतालों के जवाब के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

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