स्नातक मतदाताओं का सवाल: सर्वेश कुमार के कार्यकाल में बेरोजगार युवाओं की आवाज कितनी उठी?
स्नातक मतदाताओं का सवाल: सर्वेश कुमार के कार्यकाल में बेरोजगार युवाओं की आवाज कितनी उठी?

दरभंगा। दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे विधान पार्षद सर्वेश कुमार के कार्यकाल को लेकर बेरोजगार स्नातक युवाओं से जुड़े सवाल चुनावी चर्चा में आने लगे हैं।
स्नातक मतदाता केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा भी हैं। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ा सवाल रोजगार, रिक्त पदों पर नियुक्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं की समयबद्धता और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता का है।
बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित कई परीक्षा रद्द होने के बाद अभ्यर्थियों के बीच दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर सवाल और चिंता बनी रही। चुनावी बहस में यह प्रश्न उठ रहा है कि ऐसे मामलों में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद ने बेरोजगार अभ्यर्थियों की आवाज को किस स्तर तक परिषद में उठाया। सवाल यह है कि बेरोजगार स्नातकों की रोजमर्रा की समस्याएं—नौकरियां, प्रतियोगी परीक्षाएं, लंबित भर्तियां और परीक्षा व्यवस्था—विधान परिषद में कितनी मजबूती से उठीं?
बिहार विधान परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रश्न संबंधी रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 के बाद सर्वेश कुमार के नाम से कुल 22 प्रश्न दर्ज हैं, जिनमें चार प्रश्न शिक्षा से संबंधित हैं। यह रिकॉर्ड उनके द्वारा परिषद में उठाए गए मुद्दों की एक तस्वीर जरूर प्रस्तुत करता है,

लेकिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के संदर्भ में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि बेरोजगार स्नातक युवाओं, रोजगार के अवसरों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को उनके कार्यकाल में कितनी प्राथमिकता मिली। चुनाव के दौरान इन सवालों पर चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि बड़ी संख्या में स्नातक मतदाता रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। जिस निर्वाचन क्षेत्र का बड़ा आधार शिक्षित स्नातक वर्ग है, उसके सबसे महत्वपूर्ण रोजगार संबंधी मुद्दों पर उनके प्रतिनिधि की सक्रियता क्या रही?
