अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय कृषि के लिए घातक: अखिल भारतीय किसान सभा डेयरी और सोयाबीन किसानों पर संकट की आशंका, समझौते के विरोध में देशव्यापी संघर्ष का आह्वान जे टी न्यूज, नई दिल्ली, 21 अक्टूबर: अखिल भारतीय किसान सभा ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का कड़ा विरोध करते हुए इसे भारतीय कृषि और किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा बताया है। संगठन ने केंद्र सरकार से इस समझौते को खारिज करने और भारतीय कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा करने की मांग की है। किसान सभा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए हो रही बातचीत को लेकर कृषि क्षेत्र में चिंताएं बढ़ी हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि समझौते की शर्तों के बारे में संसद और किसानों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। किसान सभा के अनुसार, अमेरिकी डेयरी उत्पादों की भारतीय बाजार में पहुंच इस बातचीत का एक प्रमुख मुद्दा है। सोयाबीन और डेयरी किसानों पर पड़ सकता है असर किसान सभा ने आशंका जताई कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में व्यापक छूट मिलती है, तो घरेलू किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है। संगठन ने कहा कि अमेरिका में कृषि क्षेत्र को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी के कारण वहां के उत्पाद भारतीय किसानों के उत्पादों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। प्रेस विज्ञप्ति में विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक के सोयाबीन किसानों की चिंताओं का उल्लेख किया गया है। संगठन ने कहा कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती से घरेलू तिलहन उत्पादकों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। डेयरी क्षेत्र के संदर्भ में किसान सभा ने चेतावनी दी कि अमेरिकी दुग्ध उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक छूट मिलने से स्थानीय दूध उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इससे छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय तथा आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। अन्य कृषि उत्पादों के किसानों पर भी चिंता किसान सभा ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का संभावित प्रभाव मक्का, ज्वार, कपास, बादाम, अखरोट और सेब उत्पादकों पर भी पड़ सकता है। संगठन का तर्क है कि यदि आयात नीति में घरेलू किसानों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई, तो कृषि क्षेत्र में बड़ी कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है और छोटे उत्पादकों की स्थिति कमजोर हो सकती है। प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र सरकार की कृषि एवं व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा गया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों की आय, घरेलू उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समझौते के विरोध में आंदोलन की चेतावनी अखिल भारतीय किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार किसानों के हितों की अनदेखी करते हुए इस समझौते को आगे बढ़ाती है, तो संगठन इसके विरोध में व्यापक आंदोलन करेगा। किसान सभा ने अपनी सभी इकाइयों से समझौते के खिलाफ संघर्ष की तैयारी करने का आह्वान किया है। संगठन ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की ओर से 23 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित मार्च में किसानों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील भी की है। किसान सभा का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े कृषि प्रावधानों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और किसानों के हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। संगठन ने भारतीय कृषि की सुरक्षा, किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है।
डेयरी और सोयाबीन किसानों पर संकट की आशंका, समझौते के विरोध में देशव्यापी संघर्ष का आह्वान
अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय कृषि के लिए घातक: अखिल भारतीय किसान सभा
डेयरी और सोयाबीन किसानों पर संकट की आशंका, समझौते के विरोध में देशव्यापी संघर्ष का आह्वान
जे टी न्यूज,
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर: अखिल भारतीय किसान सभा ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का कड़ा विरोध करते हुए इसे भारतीय कृषि और किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा बताया है। संगठन ने केंद्र सरकार से इस समझौते को खारिज करने और भारतीय कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
किसान सभा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए हो रही बातचीत को लेकर कृषि क्षेत्र में चिंताएं बढ़ी हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि समझौते की शर्तों के बारे में संसद और किसानों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। किसान सभा के अनुसार, अमेरिकी डेयरी उत्पादों की भारतीय बाजार में पहुंच इस बातचीत का एक प्रमुख मुद्दा है।
सोयाबीन और डेयरी किसानों पर पड़ सकता है असर
किसान सभा ने आशंका जताई कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में व्यापक छूट मिलती है, तो घरेलू किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है। संगठन ने कहा कि अमेरिका में कृषि क्षेत्र को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी के कारण वहां के उत्पाद भारतीय किसानों के उत्पादों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक के सोयाबीन किसानों की चिंताओं का उल्लेख किया गया है। संगठन ने कहा कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती से घरेलू तिलहन उत्पादकों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
डेयरी क्षेत्र के संदर्भ में किसान सभा ने चेतावनी दी कि अमेरिकी दुग्ध उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक छूट मिलने से स्थानीय दूध उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इससे छोटे और सीमांत डेयरी किसानों की आय तथा आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।
अन्य कृषि उत्पादों के किसानों पर भी चिंता
किसान सभा ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का संभावित प्रभाव मक्का, ज्वार, कपास, बादाम, अखरोट और सेब उत्पादकों पर भी पड़ सकता है। संगठन का तर्क है कि यदि आयात नीति में घरेलू किसानों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई, तो कृषि क्षेत्र में बड़ी कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है और छोटे उत्पादकों की स्थिति कमजोर हो सकती है।
प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र सरकार की कृषि एवं व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा गया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों की आय, घरेलू उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
समझौते के विरोध में आंदोलन की चेतावनी
अखिल भारतीय किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार किसानों के हितों की अनदेखी करते हुए इस समझौते को आगे बढ़ाती है, तो संगठन इसके विरोध में व्यापक आंदोलन करेगा। किसान सभा ने अपनी सभी इकाइयों से समझौते के खिलाफ संघर्ष की तैयारी करने का आह्वान किया है।
संगठन ने संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) की ओर से 23 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित मार्च में किसानों से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील भी की है।
किसान सभा का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े कृषि प्रावधानों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और किसानों के हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए। संगठन ने भारतीय कृषि की सुरक्षा, किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है।



