संयुक्त किसान मोर्चा 23 दिसंबर को बेतिया में विपणन नीति के विरुद्ध प्रधानमंत्री का पुतला जलाया
संयुक्त किसान मोर्चा 23 दिसंबर को बेतिया में विपणन नीति के विरुद्ध प्रधानमंत्री का पुतला जलाया

जे टी न्यूज़, बेतिया : संयुक्त किसान मोर्चा पश्चिम चंपारण पंजाब के शंभू पूर तथा खेनारी बॉर्डर पर किसानों पर किए जा रहे हमले ,ग्रेटर नोएडा के किसानों पर सरकार द्वारा की जा रही बर्बर करवाई, लाठी चार्ज ,पानी का बौछार , रबर कारतूस से किसानों को घायल करने , बड़े पैमाने पर हो रहे किसानों की गिरफ्तारी के साथ ही मोदी सरकार की कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति रुप रेखा ने मोदी सरकार द्वारा 2022 तक किसानों के आय को दुगुनी करने पर कोई टिप्पणी नहीं करने की घोर निंदा करती है।

बिहार सरकार की गैर विनियमित कृषि बाजारों और कृषि विपणन की बदहाली और उसके निराकरण पर मौन है। जबकि बिहार सरकार ने सितंबर 2006 में एपीएमसी अधिनियम को निरस्त कर दिया था ।बिहार एस ए एम बी के नियंत्रण में बिहार में 95 एपीएमसी थे जिनमें से 54 एपीएमसी मार्केट यार्ड सुविधाओं के साथ स्थापित किए गए थे ।जबकि 41 एपीएमसी किराए के परिसर में चल रहे थे ।

एपीएमसी अधिनियम के निरस्त होने के साथ ही किराए के परिसर में चलने वाले 41 एपीएमसी बंद हो गए थे ।राज्य में विपणन स्थिति की तंत्र में सुधार करने और किसानों को बेहतर लाभ दिलाने तथा ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करने की सख्त जरूरत है। जो बिहार सरकार नहीं कर पा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े बिहार के किसान संगठन लंबे समय से बिहार में ए पी एम सी अधिनियम को पुन: बहाल करने और कृषि मंडी को चालू करने की मांग किया।लेकिन किसान विरोधी बिहार सरकार पर इसका कोई असर नहीं है। संयुक्त किसान मोर्चा पश्चिम चंपारण 2006 से बंद पड़ी बिहार के सभी मंडियों को चालू किया करने। विपणन नीति में किसानों को लाभ देने की योजना बनाने। ग्रेटर नोएडा के किसानों के मूलभूत मांगों को स्वीकार करने तथा शंभू पुर ,खेनारी बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों से अविलंब सम्मान पूर्ण वार्ता करने की मांग की गई। इस अवसर पर अवध बिहारी प्रसाद, म . सहीम, दोवा हकीम,रामेश्वर महतो आदि ने संबोधित किया।


