2 सितंबर को विश्वविद्यालय मुख्यालय, 9 से मुख्यमंत्री के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना देंगे शिक्षाकर्मी

2 सितंबर को विश्वविद्यालय मुख्यालय, 9 से मुख्यमंत्री के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना देंगे शिक्षाकर्मी

जे टी न्यूज़, पटना : राज्य के संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने अपनी नौ सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान कर दिया है। बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के आह्वान पर शिक्षाकर्मी 2 सितंबर को राज्य के सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों के मुख्यालय पर धरना देंगे। इसके बाद 9 सितंबर से मुख्यमंत्री के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की घोषणा की गई है।
फैक्टनेब के अध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ प्रसाद सिन्हा, महासचिव प्रो. राजीव रंजन एवं मीडिया प्रभारी प्रो. अरुण गौतम ने आंदोलन की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षाकर्मियों की वर्षों से लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान करना चाहिए।
विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 का विरोध
फैक्टनेब नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने संबंधी प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही पटना उच्च न्यायालय के न्यायादेश एवं बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के आलोक में शिक्षाकर्मियों को नियमित वेतन एवं पेंशन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
संगठन ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2015-18 से 2022-25 तक आठ वर्षों की परीक्षा परिणाम आधारित वेतन मद की बकाया अनुदान राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाए। इसके लिए बढ़ी हुई महंगाई दर के मद्देनजर लागू अधिसीमा बंधेज को समाप्त करने की भी मांग की गई है।
नौ सूत्री मांगों को लेकर आर-पार की तैयारी
फैक्टनेब की प्रमुख मांगों में शासी निकाय के सदस्य के लिए विश्वविद्यालय प्रतिनिधि का समय पर मनोनयन, शिक्षक प्रतिनिधि की चुनाव प्रक्रिया पूरी करना, सभी विश्वविद्यालयों में समयबद्ध तरीके से सीनेट सदस्यों का चुनाव, उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के पारिश्रमिक एवं भत्तों में समानता सहित अन्य मांगें शामिल हैं।
संगठन नेताओं ने कहा कि लंबे समय से मांगों को लेकर सरकार और विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया जाता रहा है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। अब शिक्षाकर्मियों ने चरणबद्ध आंदोलन के माध्यम से सरकार पर निर्णायक दबाव बनाने का निर्णय लिया है।
220 कॉलेज, 10 लाख विद्यार्थी और हजारों शिक्षाकर्मी
फैक्टनेब नेताओं के अनुसार बिहार में करीब 220 संबद्ध डिग्री महाविद्यालय हैं, जो राजधानी, प्रमंडल, जिला एवं प्रखंड मुख्यालयों से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन महाविद्यालयों के पास करीब 1500 एकड़ से अधिक भूमि, योग्य शिक्षक, विशाल भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, खेल सामग्री एवं खेल मैदान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इन महाविद्यालयों में करीब 10 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। संगठन का कहना है कि राज्य की बड़ी आबादी को उच्च शिक्षा से जोड़ने में संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन संस्थानों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों की समस्याओं की अनदेखी सीधे तौर पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
‘नियमित वेतन-पेंशन से खजाने पर नहीं पड़ेगा विशेष बोझ’
फैक्टनेब नेताओं ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों को परीक्षा परिणाम आधारित अनुदान के स्थान पर नियमित वेतन एवं पेंशन देने की व्यवस्था लागू करने से सरकार के खजाने पर कोई विशेष अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। इसके लिए केवल सरकार को मजबूत इच्छाशक्ति के साथ निर्णय लेने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षाकर्मी वर्षों से उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। इससे शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
2 सितंबर से आंदोलन, 9 से अनिश्चितकालीन धरना
फैक्टनेब ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के पहले चरण में 2 सितंबर को राज्य के सभी परंपरागत विश्वविद्यालयों के मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद 9 सितंबर से मुख्यमंत्री के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।


संगठन नेताओं ने कहा कि सरकार यदि समय रहते नौ सूत्री मांगों पर सकारात्मक एवं ठोस निर्णय लेती है तो आंदोलन टाला जा सकता है। अन्यथा शिक्षाकर्मी अपनी मांगों की पूर्ति तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं।
फैक्टनेब ने सरकार से अपील की है कि टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षाकर्मियों की समस्याओं का तत्काल समाधान कर बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में ठोस पहल की जाए।

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