डॉ संजीव भी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बनने के रेस में आगे
डॉ संजीव भी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बनने के रेस में आगे

जे टी न्यूज, खगड़िया:
पूर्व मंत्री आर एन सिंह के एक पुत्र एमएलसी, दूसरे पुत्र डॉ संजीव भी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बनने के रेस में आगे खगड़िया जिले में एक नाम चलता था और अभी भी है-स्मृतिशेष रामानंद सिंह उर्फ आर एन सिंह नाम हो भी क्यों न, अपने जमाने में लंदन से बीटेक कर के आए थे। बिहार सरकार के बिजली विभाग में अभियंता की नौकरी की लेकिन मिज़ाज अपने क्षेत्र के हालातों पर ही लगाए रहे। साल 1995 का था जब नौकरी छोड़ राजनीति में आ गए।
दमदार भाषण और अपने क्षेत्र के विकास का जज़्बा ने उन्हें स्टार बनाया। परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से आठ बार चुनाव लड़ा और पाँच बार जीता। नीतीश जी के बेहद क़रीबी रहे, नीतीश कुमार ने उन्हें परिवहन मंत्री भी बनाया। गंगा नदी पर बनने वाले प्रसिद्ध अगुवानी-अजगैबीनाथ महासेतु (पुल) के निर्माण की रूपरेखा और मंजूरी दिलाने में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। खगड़िया के विकास पुरुष के नाम से प्रसिद्ध है। उनका निधन 2025 में हुआ।
इनके एक बेटे डॉ संजीव कुमार जो ख़ासा चर्चा में रहते हैं। खास कर जब जदयू छोड़कर राजद में आएँ और राजद की सरकार बनाने की क़वायद की थी। तेजस्वी यादव के बेहद क़रीबी बताए जाते हैं। वहीं इनके बड़े भाई राजीव कुमार कांग्रेस से 2022 में बेगूसराय-खगड़िया स्थानीय प्राधिकरण सीट से एमएलसी हैं। इन्होंने भाजपा और राजद दोनों के उम्मीदवार को हराया था।

अब डॉ संजीव कुमार जो की 2025 मे परबत्ता सीट से हार चुके हैं, वह अपने सीट को छोड़कर और अपने क्षेत्र को छोड़कर पटना आ गए हैं। शिक्षक प्राधिकरण सीट पर क़िस्मत आज़माने। अब इनकी राह कितनी आसान है और कितनी मुश्किल है इस पर बात की जाए तो
एमएलसी का चुनाव पुरी तरह गणित पर आधारित है। यहां सबसे ज़्यादा वोट लाने वाले व्यक्ति नहीं जीतते बल्कि जीतता वहीं है जिसे वैध मत का 50% से अधिक मिलता है। यहीं सबसे बड़ा खेल है। अब तक इस चुनाव के उम्मीदवारों पर नज़र डाले तो नवल किशोर यादव, डॉ संजीव कुमार और दिव्या ज्योति मुख्य रूप से हैं।
नवल किशोर पिछले 30 सालों से जीत रहे हैं। संजीव और दिव्या नए हैं। बहरहाल तीनों मजबूत खिलाड़ी हैं। डा संजीव नए हैं लेकिन राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी हैं पिछले 6 महीने से पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एक-एक मतदाता से मिलकर समस्या को सुन रहे हैं उनसे मिल रहे हैं ओर प्यार भी खूब बांट रहे हैं और दिव्या स्थानीय हैं और इनके कालेज भी हैं तो मामला त्रिकोणीय होने की संभावना भरपूर है। यानी दुसरे वरीयता के वोट भी गिनने की संभावना बन जाएगी। यहीं सिकंदर तय करेगा। अभी कांग्रेस भी इस मैदान में आएगी यह भी चर्चा तेज है।

बता दें की डॉ संजीव कुमार के बड़े भाई राजीव कुमार भी दुसरे वरीयता के वोट से ही बेगूसराय खगड़िया स्थानीय निकाय में जीत दर्ज की थी। तो इस खेल में डां संजीव कुमार माहिर है इसलिए मैदान में कूदें है! 30 साल से बने हुए भाजपा उम्मीदवार नवल किशोर यादव की पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता में उनके प्रति गुस्सा देखने को मिल रहा है जिससे राजद प्रत्याशी डॉ संजीव कुमार को ज्यादा मजबूती देखने को मिल रहा है।अब तो आगे समय ही बताएगा की खेल कितना ओर दिलचस्प होगा।