भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध होगी शिक्षक-शिक्षा : प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज में विशिष्ट व्याख्यान, भावी शिक्षकों ने जानी भारतीय ज्ञान प्रणाली की शैक्षिक उपयोगिता

भारतीय ज्ञान परंपरा से समृद्ध होगी शिक्षक-शिक्षा : प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज में विशिष्ट व्याख्यान, भावी शिक्षकों ने जानी भारतीय ज्ञान प्रणाली की शैक्षिक उपयोगिता

बिरसिंहपुर, समस्तीपुर, 9 अक्टूबर। संत पॉल टीचर्स’ ट्रेनिंग कॉलेज, बिरसिंहपुर में शुक्रवार को “शिक्षक-शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण : वर्तमान स्थिति और नवोन्मेषी संभावनाएं” विषय पर विशिष्ट अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रकोष्ठ (आईकेएस सेल) के तत्वावधान में तथा आरएसी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान-विरासत को आधुनिक शिक्षक-शिक्षा से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति एवं संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रोफेसर प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने बीएड प्रशिक्षुओं को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की शैक्षिक उपयोगिता, समकालीन शिक्षण-पद्धतियों में उसके समावेशन और नवाचार की संभावनाओं पर विचार रखे।

व्याख्यान में भारतीय दर्शन, संस्कृति, भाषा, साहित्य, ज्ञान-विज्ञान और जीवन-मूल्यों को वर्तमान शैक्षिक संदर्भों में समझने पर बल दिया गया। प्रशिक्षुओं को भारतीय ज्ञान परंपरा की विविध दृष्टियों से परिचित होने और उसके शैक्षिक महत्व पर विचार करने का अवसर मिला। व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र में प्रशिक्षुओं ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं और विषय पर संवाद किया।

दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना से हुआ। संगीत के सहायक प्राध्यापक रोहित कुमार ने प्रशिक्षुओं के साथ गणेश वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद अतिथि सम्मान, बीएड प्रशिक्षुओं द्वारा स्वागत गीत और डॉ. अर्पणा कुमारी के स्वागत संबोधन के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा।

विषय की रूपरेखा डॉ. अमित कुमार पाण्डेय ने प्रस्तुत की। प्रशिक्षु प्रेरणा कुमारी एवं दर्पण कुमारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित प्रस्तुति दी। इसके बाद प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल का व्याख्यान हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं को विषय से जुड़े सवाल पूछने और अपने विचार साझा करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता द्विवेदी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर

प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी के नेतृत्व में आयोजित इस शैक्षणिक पहल का उद्देश्य भावी शिक्षकों को भारतीय ज्ञान-विरासत से परिचित कराना और उसे वर्तमान शैक्षिक आवश्यकताओं से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित नैतिक मूल्यों, तार्किक चिंतन, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और समग्र व्यक्तित्व विकास जैसी अवधारणाओं की प्रासंगिकता पर जोर दिया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी भारतीय ज्ञान, भाषाओं, कला, संस्कृति और परंपराओं को शिक्षा से जोड़ने तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक समग्र एवं संदर्भपरक बनाने पर बल देती है। इसी संदर्भ में वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अतीत की विरासत के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा को अधिक मानवीय, मूल्यपरक और सृजनशील बनाने वाले महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखने की आवश्यकता रेखांकित की।

महाविद्यालय का यह आयोजन भावी शिक्षकों में भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रति अकादमिक रुचि विकसित करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने उन्हें सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए आधुनिक शैक्षिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया।

Related Articles

Back to top button